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आत्मविकास के 9 मार्ग (9ways of self Development)

#आत्मविकास के 9 मार्ग आत्मविकास   प्रथ्वी पर लड़े गये विनाशकारी महायुद्धों जैसें महाभारत का युद्ध, रामायण का राम - रावण युद्ध, प्रथम विश्व युद्ध तथा द्धितीय विश्व युद्ध के  परिणामों की जब चर्चा की जाती हैं,तो एक पक्ष की हार तथा दूसरें पक्ष की जीत से अधिक मानवता के विनाश की चर्चा कभी कभार कर ली जाती हैं. लेकिन इन युद्धों से पूर्व और पश्चात आत्मा का भी अत्यधिक विनाश हुआ और आज भी हो रहा हैं,जिसकी चर्चा बहुत सीमित रूप से ही हम कर पातें हैं.  इन युद्धों के पूर्व यदि मनुष्य अपना आत्मावलोकन कर लेता तो शायद मानवता इससे कही अधिक उन्नत होती. आईयें जानतें हैं आत्मवलोकन का मार्ग क्या हैं या आत्मविकास कैसे करें ## 1.सत्य वचन  दुनिया में सत्य वचनों की बात तो बहुत होती हैं,किंतु सत्य वचन बोलनें वाले मुठ्ठीभर लोग ही होतें हैं. हितोपदेश में लिखा हैं,कि असत्य वचन वाणी का गंभीर पाप हैं,जिसके बोलनें से आत्मा संताप को प्राप्त होती हैं. ● 16 संस्कारो का विस्तृत विवेचन कभी उस परिस्थिती के बारें में विचार करें जब आपनें झूठ बोला था तब आपके मन में कौंन - कौंन से न...