मादकद्रव्यों का सेवन अनादिकाल से ही होता आया हैं.देवता भी इसके प्रभाव से अछूतें नहीं रह सकें हैं,सोमरस के साथ देवताओं की महफिल सजा करती थी. भांग ओर गांजा तो धार्मिक और सांस्कृतिक रिति - रिवाजों में बस चुके हैं. किन्तु यहाँ इनका प्रयोग की सीमित ही अनुमति दी गई हैं. किन्तु वर्तमान समय की बात की जायें तो प्रत्येक प्रकार के नशे का बढ़ता चलन न केवल स्वास्थ को नुकसान पहुँचा रहा हैं,बल्कि अनेक सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहा हैं जैसें साम्प्रदायिक सद्धभाव ###पारिवारिक विघट़न ::: एक समाजशास्त्रीय शोध के अनुसार प्रत्येक पारिवारिक लड़ाई झगड़ो एँव मनमुटाव के पिछे आर्थिक कारणों के साथ मघपान या दूसरें नशों का सेवन मुख्य कारण हैं. दहेज के उत्पीड़न के मामलों में 60% के मूल में पति, पत्नि या घर के दूसरे सदस्यों का नशा करना भी शामिल हैं. नशा करनें का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव परिवार झेलता हैं, सोचियें यदि घर में कोई एक कमाने वाला पुरूष अपनी कमाई का तीन चौथाई भाग नशे में उड़ा दे,तो परिवार विघटित हो जायेगा, पत्नि बच्चों के पालन पोषण के लिये या तो मेहनत मज़दूरी करेगी ...
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