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औषधियों में विराजमान नवदुर्गा

औषधियों में विराजमान नवदुर्गा एक मत यह कहता है कि ब्रह्माजी के दुर्गा कवच में वर्णित नवदुर्गा नौ विशिष्ट औषधियों में विराजमान हैं। ◆●◆●◆●◆●◆●◆● हरड़ (1) प्रथम शैलपुत्री (हरड़) :  शैलपुत्री कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है। यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है।  (2) ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी) :  ब्राह्मी  ब्रम्हचारिणी ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है। इसलिए इसे सरस्वती भी कहा जाता है। (3) चंद्रघंटा (चंदुसूर) :  चन्द्रघंटा यह एक ऎसा पौधा है जो धनिए के समान है। यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं।  (4) कूष्मांडा (पेठा) :  माता कुष्मांडा इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है। इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रोगों में यह अमृत समान है।  (5) स्...