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16 संस्कार न केवल हिन्दुओं के बल्कि मानव मात्र के - एक वृहद विश्लेषण [16 Sanskar ]

 1.संस्कार एक  परिचय ::: भारतीय सभ्यता एँव संस्कृति में सदियों से संस्कार को विशिष्ट स्थान प्राप्त रहा हैं.संस्कार के कारण ही मनुष्य पशुओं से प्रथक होकर संस्कारित हुआ हैं.यदि शाब्दिक दृष्टिकोण से विचार करें तो संस्कार वह हैं जो मनुष्य को निराकार से साकार बनाकर समाज के लिये उपयोगी बना दें. संस्कार के माध्यम से ही मनुष्य शारिरीक,मानसिक,सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से परिष्कृत होता हैं. # 2.संस्कार क्यों ? ::: संस्कार के बिना भी मनुष्य जिन्दा रह सकता हैं,फिर संस्कार की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसका सीधा जवाब यह हैं कि प्राण तो प्रत्येक जीव जगत में मोजूद हैं,परन्तु भारतीय संस्कृति में विकसित संस्कार ने मनुष्य को खानें पीनें और मेथुन की क्रिया से परें हटकर आत्म विकास और समाज विकास हेतू प्रेरित और प्रोत्साहित किया ताकि मनुष्य आगामी पीढ़ी को बेहतर बना सकें.संस्कार ही मनुष्यों को दया,क्षमा,उचित ,अनुचित,में भेद करना सीखाते हैं. भारतीय जीवन दर्शन कुल 16 संस्कारों को व्यक्ति के विकास हेतू जीवन में क्रियान्वित करनें पर बल देता हैं. जो इस प्रकार है. # 1.गर्भाधान सं...