भारत भूमि पर प्राचीन काल से ही ऐसें विद्धान जन्म लेते रहें हैं,जिन्होनें समाज का पतन होनें पर समाज को अपनें कर्मों और विचारों से आगें बढ़ाया.चाहे वह भगवान राम हो,कृष्ण हो,स्वामी विवेकानंद हो,या महात्मा गांधी रहे हो. स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद का जन्म भारत में ऐसे समय में हुआ था,जब 1857 की क्रांति असफल हो गई थी,भारतीय दर्शन,वैदिक परपंरा और धर्म की खुलकर बात भी करनें वाला कोई नहीं था,क्योंकि अंग्रेंजी पाशविकता चरम पर थी.पश्चिमी विद्धान भारत को अपनें धर्म प्रचार की उर्वरा भूमि के तोर पर देख रहे थें. ऐसे समय में भारतीय धर्म और दर्शन को प्रतिष्ठित करनें वाले स्वामी विवेकानंद ही थें.जिन्होनें शिकागो धर्मसभा 1893 में जब उद्भोदन देना शुरू किया " मेरें अमेरिकी भाई और बहनों" तो सम्पूर्ण सभासद अवाक् रहकर लम्बें समय तक सिर्फ तालिया ही बजातें रह गयें.इसके पश्चात अनेक जगह घूमकर स्वामी जी नें वेद,भारतीय दर्शन,साहित्य की जो व्याख्या प्रस्तुत की उसे सुनकर अनेक अमेरिकी विद्धानों को कहना पड़ा था कि " उनके देश में पाश्चात्य धर्म प्रचारकों को भेजना कितनी बड़ी मूर्खता ह...
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