हाइपोथाइराँड़िज्म क्या है हमारें गले में स्वर यंत्र के ठीक निचें व साँस नली के दोनों तरफ तितली के समान संरचना होती हैं यही संरचना थायराँइड़ के नाम से पहचानी जाती है.इससे निकलनें वालें हार्मोंन रक्त में मिलकर शरीर की गतिविधियों को नियत्रिंत करते है.इस ग्रंथि को मस्तिष्क में मोजूद पिट्यूटरी ग्रंथि नियत्रिंत करती है,जब इस ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोंन जैसें टी - 3 यानि ट्रायोडोथायरोनीन और टी -4 या थायराँक्सीन कम मात्रा मे निकलते है तो शरीर मे कई तरह की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं इस अवस्था को हायपोथाइराँइडिज्म कहते है. हाइपोथायरायडिज्म के कारण १. कम मात्रा में आयोड़िन का सेवन. २.दवाओं का व सर्जरी का दुष्प्रभाव. ३.आँटो इम्युन डिसआर्डर (इसमें शरीर का रोग प्रतिरोधी तंत्र थायराँइड ग्रंथि पर आक्रमण कर देता है,के कारण . ४.अन्य हार्मोंनों का असन्तुलन. ५.पारिवारिक इतिहास होने पर हाइपोथायराँडिज्म की समस्या हो जाती है. हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण १.वज़न बढ़ना २.थकान व कमज़ोरी ३. उदासी ,माँसपेशियों मे खिचाँव, पैरों मे सूजन ...
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