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बलात्कार हुआ था अब आगे कैसी जिंदगी जीना है

  बलात्कार हुआ था अब आगे कैसी जिंदगी जीना है   बलात्कार शब्द सुनते ही इस हादसे से पीड़ित महिला कांपने लगती हैं, किशोरीयों,बच्चीयों के लिए यह ऐसा जख्म होता हैं जिसे जब कूरेदा जाता हैं तब भय, एकाकीपन, बेइज्जती,और  समाज का कभी न खत्म होने वाला संदेह नामक मवाद ही बाहर निकलता है। और इसी कारण बलात्कार पीड़िता या तो समाज से पूरी तरह से कट जाती हैं या फिर आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेती हैं, लेकिन क्या एक हादसे के बाद जिंदगी खत्म मान लेना चाहिए ? अ,ब,स नामक एक बलात्कार पीड़िता हैं और इस ज़ख्म से उबरने का प्रयास कर रही हैं अब अ,ब,स, तमाम कांउसलिंग सेशन के बाद भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि वह भी सामान्य जीवन जी सकती हैं ।  यह कहानी हर बलात्कार पीड़िता के लिए सही है लेकिन क्या इस प्रकार  बलात्कार के बाद के जीवन को बर्बाद कर देना स्वयं, समाज,और राष्ट्र के दृष्टिकोण से उचित है ? नहीं ना तो आईए फिर से खड़े होकर जवाब देने की कोशिश करते हैं  • आत्महत्या व्यक्तित्व का गंभीर नकारात्मक रुप अब कहां जाऊं  हर बलात्कार के बाद जब थोड़ा सा समय गुजरने लगता हैं,हर पीड़िता...