भारत और विश्व के अन्य विकासशील राष्ट्रों की एक महत्वपूर्ण समस्या रक्ताल्पता या (anemia) हैं,जिससे विश्व की दो तिहाई जनसँख्या जूझ रही हैं ,अनेक अनुसंधानों से यह बात साबित हो गई हैं कि महिलायें और बच्चें यदि अपनी पृारंभिक उम्र में रक्ताल्पता से ग्रसित हो जातें हैं, तो उनकी पूरी उम्र बीमारीयों का इलाज करते हुये गुजरती हैं,आयुर्वैद में इस बीमारीं का सुन्दर वर्णन कामला,पांडू के अन्तर्गत हैं. यदि सम्पूर्ण उपचार लिया जाय तो आयुर्वैद चिकित्सा पद्ति रक्ताल्पता का प्रभावी प्रबंधन करती हैं. आईयें जानते हैं उपचार-: ह्रदय की अनियमित धड़कन के बारें में जानें यहाँ १.लोह भस्म, नवायस लोह,शिलाजित, केसर, पुर्ननवा, द्राछा,रक्त चंदन, अश्वगंधा, मुनुक्का,बायबिडंग को गाय के दूध में मिलाकर खीर की भाँति उबालकर लगातार आठ हफ्तों तक सेवन करें. २.लोहासव,पुर्ननवारिष्ट, अम्रतारिष्ट को दो- दो चम्मच मिलाकर भोजन के बाद सम भाग जल के साथ ले. ३.स्नान के पूर्व पूरे शरीर पर तिल तेल की मालिश करें. ४. योगिक क्रियाएँ कपालभाँति, अनुलोम-विलोम करें. नोट-: वैघकीय परामर्श आवश्यक हैं. ० fitness के लिये...
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