# 1. चुम्बक का इतिहास लगभग 600 ईसा पूर्व एशिया माइनर की " मैग्नेशिया " नामक जगह कुछ ऐसे पत्थर पाये गयें जिनमें लोहे को अपनी ओर आकर्षित करनें की अद्भभूत क्षमता थी.मैग्नेशिया नामक जगह पर पायें जानें की वज़ह से ही इनका नाम मैग्नेट़ रखा गया. भारतवर्ष में चुम्बक के ग्यान का इतिहास इससे भी पुराना हैं. रामायण में कई जगहों पर चुम्बक के कार्यों का उल्लेख लोहे को आकर्षित करनें वाली वस्तु के रूप में हुआ हैं. Magnet therpy # 2.चुम्बक के गुण :: चुम्बक में लोहें की वस्तुओं को आकर्षित करनें,एक चुम्बक द्धारा दूसरें चुम्बक के विपरीत सिरे आकर्षित करनें,समान सिरे प्रतिकर्षित करनें तथा चुम्बक को स्वतंत्रता पूर्वक लटकानें पर उत्तर दक्षिण दिशा में ठहरनें का गुण पाया जाता हैं. चुम्बक का जो सिरा उत्तर दिशा में ठहरता हैं,उसे उत्तरी सिरा और जो सिरा दक्षिण दिशा में ठहरता हैं. उसे दक्षिणी सिरा कहतें हैं. ● ट्यूबरक्लोसिस के बारें में जानकारी इस लिंक पर जाकर देखें ...
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