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चुम्बक का इतिहास चुम्बक के गुण और चुम्बक चिकित्सा (Magnet Therpy)

# 1. चुम्बक का इतिहास 

लगभग 600 ईसा पूर्व एशिया माइनर की "मैग्नेशिया " नामक जगह कुछ ऐसे पत्थर पाये गयें जिनमें लोहे को अपनी ओर आकर्षित करनें की अद्भभूत क्षमता थी.मैग्नेशिया नामक जगह पर पायें जानें की वज़ह से ही इनका नाम मैग्नेट़ रखा गया.

भारतवर्ष में चुम्बक के ग्यान का इतिहास इससे भी पुराना हैं.रामायण में कई जगहों पर चुम्बक के कार्यों का उल्लेख लोहे  को आकर्षित करनें वाली वस्तु के रूप में हुआ हैं.

Magnet
 Magnet therpy

# 2.चुम्बक के गुण ::

चुम्बक में लोहें की वस्तुओं को आकर्षित करनें,एक चुम्बक द्धारा दूसरें चुम्बक के विपरीत सिरे आकर्षित करनें,समान सिरे प्रतिकर्षित करनें तथा चुम्बक को स्वतंत्रता पूर्वक लटकानें पर उत्तर दक्षिण दिशा में ठहरनें का गुण पाया जाता हैं.

चुम्बक का जो सिरा उत्तर दिशा में ठहरता हैं,उसे उत्तरी सिरा और जो सिरा दक्षिण दिशा में ठहरता हैं.
उसे दक्षिणी सिरा कहतें हैं.

#3.चुम्बक चिकित्सा ::

चुम्बक के इन सामान्य गुणों के अलावा कुछ विशेष गुण पायें जातें हैं,किन्तु इन गुणों की ओर जनसामान्य का ध्यान लगभग नहीं के बराबर रहा हैं.यही कारण हैं,चुम्बक चिकित्सा आज के समय में इतनी लोकप्रिय नहीं हैं.

इसकी उपयोगिता तभी देखनें को मिलती हैं,जब कोई जनसामान्य इससे स्वस्थ होकर इसके फायदों के बारें में लोगों को बताता हैं.

चुम्बक न केवल लोहे को आकर्षित करता हैं,वरन चुम्बक प्रत्येक सजीव और निर्जीव पदार्थों को अपनी चुम्बकीय शक्ति से आकर्षित करता हैं. 

प्रथ्वी भी चुम्बक का ही रूप हैं,हम जो कुछ भी खातें हैं पीतें हैं वह प्रथ्वी की गुरूत्वाकर्षण शक्ति के बल पर ही हमारें पेट़ में स्थिर होकर पाचन क्रिया द्धारा पचता हैं.
यदि गुरूत्वाकर्षण बल नहीं होता तो हमारा भोजन पानी नीचें नहीं जाकर ऊपर की ओर आता और तब शायद प्रथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नही हो सकती थी.

जिस प्रकार चुम्बक के आसपास चुम्बकीय क्षेत्र होता हैं,उसी प्रकार मनुष्य का शरीर भी " आँरामण्ड़ल " से आच्छादित रहता हैं.यह आँरामण्ड़ल ही मनुष्य को स्वस्थ रखता हैं.

जिस प्रकार चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र अव्यवस्थित हो जानें पर चुम्बक अपनें चुम्बकीय गुणों को खो देता हैं,उसी प्रकार मनुष्य का आँरामण्ड़ल अव्यवस्थित होनें पर मनुष्य बीमारीयों की चपेट़ में आ जाता हैं.

विशेष किस्मों , विशेष चुम्बकीय क्षमता तथा उचित ध्रुवों वालें चुम्बकों का प्रयोग कर कई असाध्य रोगों जैसें कैंसर,मधुमेह,गठिया,मानसिक विकारों,अस्थमा, एलर्जी,उच्च रक्तचापनिम्न रक्तचाप  को आसानी से ठीक किया जा सकता हैं.

चुम्बक मनुष्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को इतना अधिक ताकतवर बना देता हैं,कि मनुष्य बिना किसी बीमारी के 100 वर्षों तक आसानी से जी सकता हैं.

हड्डीयों से संबधित बीमारीयों में चुम्बकों का प्रयोग हड्डीयों को गहरें तक प्रभावित कर बहुत सटीक उपचार करता हैं.

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में मानसिक रोगों का उपचार काफी महँगा पढ़ता हैं,जो आम नागरिकों के बस से बाहर की बात होती हैं,किन्तु चुम्बक चिकित्सा द्धारा बहुत कम पैसों में इसका प्रभावी और सटीक उपचार संभव हैं.

यदि सही ताकत और सही ध्रुवों वालें चुम्बकों का प्रयोग रोगी पर किया जायें तो परिणाम काफी सटीक और शीघ्र मिलतें हैं.

इसके लियें चुम्बक चिकित्साशास्त्री को गहन अध्ययन की आवश्यकता होती हैं.जो आज के समय की महती आवश्यकता हैं,क्योंकि अधिकांश चुम्बक चिकित्सतकों को चुम्बक चिकित्सा का बहुत कम ग्यान हैं.

चुम्बक चिकित्सा में पहले और बाद में किसी भी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता हैं,जो इस चिकित्सा की बहुत बड़ी विशेषता हैं.

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