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संदेश

SANJIVANI VATI ,CHANDRAPRABHA VATI,SHANKH VATI

१.संजीवनी वटी::-   संजीवनी वटी का वर्णन रामायण में भी मिलता हैं. जब मेघनाथ के साथ युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हुए तो  संजीवनी  बूटी ने लक्ष्मण को पुन: जीवन दिया था शांग्रधर संहिता में वर्णन हैं कि  "वटी संजीवनी नाम्ना संजीवयति मानवम" अर्थात संजीवनी वटी नाना प्रकार के रोगों में मनुष्य का संजीवन करती हैं.आधुनिक शब्दों में यह वटी हमारें बिगड़े मेट़ाबालिज्म को सुदृढ़ करती हैं.तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity)   बढ़ाती हैं. घटक द्रव्य:: विडंग,शुंठी,पीप्पली,हरीतकी,विभीतकी, आमलकी ,वच्च, गिलोय ,शुद्ध भल्लातक,शुद्ध वत्सना उपयोग::- सन्निपातज ज्वर,सर्पदंश,गठिया,श्वास, कास,उच्च कोलेस्ट्रोल, अर्श,मूर्छा,पीलिया,मधुमेह,स्त्री रोग ,भोजन में अरूचि. मात्रा::- वैघकीय परामर्श से Svyas845@gmail.com २.चन्द्रप्रभा वटी::- चन्द्रप्रभेति विख्याता सर्वरोगप्रणाशिनी उपरोक्त श्लोक से स्पष्ट हैं,कि चन्द्रप्रभा वटी समस्त रोगों का शमन करती हैं. घट़क द्रव्य::- कपूर,वच,भू-निम्बू, गिलोय ,देवदारू,हल्द...

ARJUNARISTH ,ABHYARISTH

अर्जुनारिष्ट़::-   ह्रदय रोग  चिकित्सा में अर्जुनारिष्ट अपना विशेष स्थान रखता हैं.भैषज्य रत्नावली में वर्णित श्लोकानुसार मासमात्रं स्थितो भाण्डे भवेत्पार्थाघरिष्टक:ह्रत्फुफ्फसगदान् सर्वान् ह्नत्ययं बलवीर्यक्रत   घटक का नाम अर्जुन छाल, मुनुक्का,महुए के फूल,गुड़ एँव धायफूल ह उपयोग यह अरिष्ट उत्तम ह्रदय रोग  नाशक हैं.पित्तप्रधान ह्रदय रोग और फेफड़ों की सूजन से फूली हुई शिथिल नाड़ियों को संतुलित और द्रढ बनाकर निर्बलता को दूर करता है तथा शरीर में बल  लाता हैं.ह्रदय- शूल,ह्रदय शैथिल्य ,शरीर में पसीना अधिक आना,मुँह सूखना,नींद कम आना,शरीर में रक्त संचार ठीक नहीं होना आदि विविध रोगों में उत्तम लाभकारी औषधि हैं.   मात्रा वैघकीय सलाह से Svyas845@gmail.com अभयारिष्ट::-  ़ अस्याभ्यासादरिष्टस्य नस्यन्ति गुदजा द्रुतम ग्रहणीपाणडुहद्रोगप्लीहगुल्मोदरापह:कुष्ठशोफारूचिहरो बलवर्णाग्निवर्धन भैषज्य रत्नावली के अनुसार रोग और रोगी का बल,अग्नि और कोष्ठ का विचार करके यदि उचित मात्रा में इसका सेवन किया जावें तो सब प्रकार के उदर रोग नष्ट ...

YOGA AND HEALTHY LIFESTYLE

दिनचर्या:: निरोगी जीवन की कामना करनें वाले बुद्धिमान व स्वस्थ व्यक्ति द्वारा प्रतिदिन किये जानें वाले आचरण को दिनचर्या कहते हैं आयुर्वैद ग्रन्थों में स्वस्थ शरीर के लिये सही और नियमित दिनचर्या पर विशेष ज़ोर दिया हैं.आईयें जानते हैं कैसी हो दिनचर्या सुबह:: सुबह ब्रम्ह मूहूर्त मे उठना(समय प्रात: 4.30 बजे से 6.00 बजे तक) प्रथ्वी को प्रणाम कर ताम्र पात्र में रखा जल पीना व अपने इष्ट देव का  स्मरण करना.फिर दैनिक क्रिया से निवृत होकर 2 से 3 कि.मी.प्रतिदिन खुली हवा में पैदल चलना स्वास्थकर हैं. कपालभाँति ,सूर्य नमस्कार ,अनुलोम-विलोम जैसी योग क्रियाएँ करें.सुबह नीम,तुलसी,पुदीना  की २ से ३ पत्तियाँ जल से लेने पर ह्रदय ,मधुमेह, उच्च रक्तचाप,व अन्य खतरनाक बीमारीयों से बचाव होता हैं. १० से १५ मिनिट नियमित रूप से योग एवँ प्राणायाम करें सप्ताह में तीन दिन नहानें से पहलें तिल या सरसों तेल की मालिश कर धूपसेवन करना चाहियें. प्रतिदिन स्नान के लिये मोसमानुसार जल ले. सुबह ८ से ९ बजे के बच नाश्ता करें नाश्ते में अंकुरित चना,मूंग,गेंहू व मोसमी फलों को रखें. दोपहर:: १२ स...

शिलाजित।SHILAJIT HERBAL CORTICOSTEROID

शिलाजित::- शिलाजित हिमालय,तिब्बत और काकेसस पहाड़ी के 1000 से 5000 मीट़र ऊँचाई पर पायी जानें वाली दुर्लभ औषधि हैं.यह औषधि चट्टानों पर पायी जाती हैं.इसका रंग धूसर काला से लगाकर हल्का पीलापन लियें होता हैं, गर्मीयों में यह औषधि चट्टानों से पिघलकर गिरती रहती हैं. हमारें रिषी मुनियों ने पाँच हजार वर्ष पूर्व से ही इसकी महत्ता को प्रमाणित करते हुये लिखा हैं शिलाजं कटु तिक्तोष्णं कटुपाकं रसायनम्  छेदि योगवहं हन्ति कफमे हाश्मशर्करा मूत्रकृच्छ छयं श्वासं वाताशार्सि च पाण्डुताम् अपस्मारं तथोन्मादं शोथकुषटोदरक्रिमीन.   घट़क द्रव्य :: शिलाजित का मुख्य घट़क फिलविक एसिड़ हैं,इसके अलावा इसमें ह्यूमिक एसिड़, फास्पोलिपिड़, पाँलीफिनोल समूह, अनेक खनिज़ पदार्थ विटामिन ए,बी,सी,और पी पाया जाता हैं.इसके अलावा गोण खनिज़ पदार्थ जैसे कोबाल्ट,निकल,कापर,जिंक,मेंगनिज़,और लोह तत्व प्रचुरता में पाये जातें हैं. शिलाजीत के फायदे ::- चायना आज खेल दुनिया की महाशक्ति हैं इसके पिछे उनकी कठोर मेहनत के अलावा शिलाजित का भी महत्वपूर्ण योगदान हैं.और चायना ने आज तक इस बात को राज़ बनाकर रखा हैं । ,प्...

HOW TO INCREASE BREAST SIZE IN HINDI

सुँदर और सुड़ोल स्तन हर नारी का सपना होता हैं, क्योंकि यहीं नारीत्व को निखारतें हैं. कई बार देखनें में आता हैं, कि कम उभार की वज़ह से स्त्रीयाँ हीन भावना की शिकार हो जाती हैं.कई बार यह भी देखनें में आता हैं, कि मँहगे कास्मेंटिक इस्तेमाल के बावजूद स्तनों का पूर्ण विकास नहीं हो पाता ,तो आईयें जानतें हैं कुछ सरल,प्रभावी आयुर्वैदिक उपचार   उपचार:: १.बादाम गिरी,  को बारीक पीस लें और तिल तेल को मिलाकर स्तनों के आसपास नहानें से एक घंटा पहलें लगायें स्तनों में दो महिनों मे उभार आ जावेगा. २.तिल तेल,में चंदन घीसकर मिला दें इस घोल को बारह घंटे बाद स्तनों पर लगायें .ढीलें स्तनों में कसावट का अच्छा उपाय हैं. ३.शतावरी चूर्ण को सुबह शाम एक-एक चम्मच तीन माह तक लेने से स्तनों के विकास के साथ दूध में बढोतरी होती हैं. ४.अशोक छाल चूर्ण को रात में पानी में भीगोंकर रख दें सुबह पानी निकाल कर चूर्ण में मुलतानी मिट्टी मिलाकर स्तनों के आसपास लगायें . ५.तिल तेल से स्तनों की दस मिनिट़ तक हल्के हाथों से मालिश करें. ६.कपास तेल को दूध में मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें स्तनों के विकास के साथ द...

डेंगू का आयुर्वेदिक इलाज

span style="color: red;">#1.सामान्य जानकारी::- डेँगू वायरस जनित रोग  हैं,जो कि एडिज एडिप्टि  मच्छर के संक्रमित व्यक्ति को काटने के पश्चात स्वस्थ व्यक्ति को काटनें से फैलता हैं. डेँगू की विकास अवधि हमारें शरीर में सात से चोदह दिन होती हैं. इसका मच्छर मुख्यत: दिन के समय और शरीर के निचले हिस्सों मे काटता हैं। डेँगू का प्रकोप उष्णकटिबंधीय देशों मे अधिक होता हैं.इस बीमारी का अभी तक कोई मान्यता प्राप्त ईलाज़ नहीं हैं.मात्र लाक्षणिक चिकित्सा ही की जाती हैं #2. डेंगू के लक्षण:: १. बुखार लगातार १०४ डिग्री फेरेनाइट से अधिक चिकित्सा के बाद भी बनें रहना. २. आँखों के निचें लगातार तेज़ दर्द  जिससे देखने की समस्या हो जाती हैं. ३. जोंड़ों में तेज दर्द . ४.शरीर में चकते होना. ५.उल्टी. ६.रक्त में स्थित प्लेटलेट्स का अचानक कम होना ७. ब्लड़ प्रेशर का अचानक से कम होना. #3. डेंगू का आयुर्वेदिक उपचार::- १. रोगी को तनाव मुक्त रखनें का प्रयास करें निर्जलीकरण से बचानें के लिये पानी का पर्याप्त सेवन करवायें,इसके लिये ओ.आर.एस.का घोल बना के पीला...

OMEGA 3 FATTY ACID

Omega 3 fatty acids                omega 3 fatty acid #What are omega 3 fatty acid Omega 3 fatty acid belong to polyunsaturated fatty Acids ( PUFA).The position of double bonds found in omega 3 fatty acids is different from other fatty acids which makes them unique. omega 3 fatty acids include eicosa pentaenoic acid (EPA) and Docosa Hexeanoic acid (DHA).The simplest omega 3 fatty acid is called Alapha linolenic acid (ALA).ALA can't be made in the body.plant and animal food which are very common comprise of ALA. #Sources of omega 3 fatty acids The primary dietary sources of omega 3 fatty acids include fishes,plants,and but oils.fishes such as samon,trout,herring,sardines and tuna contain large amounts of omega 3 fatty acids. Soyabean,pumpkin seeds,walnuts flaxseed and its respective oil extracts oil rich sources of ALA.Algae and krill are also good sources of omega 3 fatty acids. #Symptoms of deficiency of omega 3 f...