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एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं

#1.एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन क्या हैं ?  एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन प्रणाली से अभिप्राय यह हैं,कि मृदा उर्वरता को बढ़ानें अथवा बनाए रखनें के लिये पोषक तत्वों के सभी उपलब्ध स्त्रोंतों से मृदा में पोषक तत्वों का इस प्रकार सामंजस्य रखा जाता हैं,जिससे मृदा की भौतिक,रासायनिक और जैविक गुणवत्ता पर हानिकारक प्रभाव डाले बगैर लगातार उच्च आर्थिक उत्पादन लिया जा सकता हैं.   विभिन्न कृषि जलवायु वाले क्षेत्रों में किसी भी फसल या फसल प्रणाली से अनूकूलतम उपज और गुणवत्ता तभी हासिल की जा सकती हैं जब समस्त उपलब्ध साधनों से पौध पौषक तत्वों को प्रदान कर उनका वैग्यानिक प्रबंध किया जाए.एकीकृत पौध पोषक तत्व प्रणाली एक परंपरागत पद्धति हैं. ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// यहाँ भी पढ़े 👇👇👇 प्रधानमन्त्री फसल बीमा योजना ० कृषि वानिकी क्या हैं ///////////////////////////////////////////////////////////////////////// #2.एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन का महत्व :: अब एकीकृत पौध पोषक तत्व प्रणाली का महत्व इसलिये हैं,कि बढ़त...

Medical colleges in India [भारत के प्रमुख मेड़िकल कालेज ]

भारत की आबादी लगातार बढ़ रही हैं,इस आबादी की स्वास्थ्य ज़रूरतें भी लगातार बढ़ रही हैं,जिन्हें पुरा करनें के लिये देश में चिकित्सा महाविधालय (medical college) की भी स्थापना सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में की गई हैं. देश में एम.बी.बी.एस.की पढ़ाई के लिये साढ़े पाँच साल अवधि का कोर्स संचालित किया जाता हैं,जिसमें एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशीप सम्मिलित हैं. आईयें जानतें हैं,देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के बारें में जहाँ M.B.B.S. की पढ़ाई करवाई जाती हैं. #1. All india Institute of medical science [Aiims] ::: मेड़िकल की पढ़ाई के लियें यह सर्वाधिक प्रतिष्ठित संस्थान माना जाता हैं.जहाँ से निकले डाँक्टर देश और विदेशों में काफी प्रतिष्ठा कमा रहें हैं. एम्स में एड़मिशन के लिये प्रतिवर्ष अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती हैं,जो आनलाईन पद्धति पर आधारित होती हैं.देश में कुल 7 एम्स हैं,जो कि दिल्ली,भोपाल,पटना,भुवनेश्वर,जोधपुर,रायपुर और रिषीकेश में स्थित हैं. इनमें से प्रत्येक एम्स में एम.बी.बी.एस.की 100 सीट़े हैं.इस तरह कुल 700 सीटों पर प्रवेश दिया जाता हैं...

आश्रम व्यवस्था [Asharama system] :: एक विश्लेषण

 गुरु और शिष्य  आश्रम का अर्थ ::: भारतीय जीवन पद्धति मनुष्य जीवन को 100 वर्षों का मानती हैं.और 100 वर्षों के जीवन चक्र को शरीर की ,समाज की उपयोगिता आवश्यकता के दृष्टिकोण से चार भागों में विभाजित करती हैं. आश्रम का अर्थ भी श्रम यानि उघम हैं,अर्थात मनुष्य श्रम करता हुआ जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त करें. आश्रम का एक अन्य अर्थ ठहराव या पड़ाव भी हैं.ये वे ठहराव स्थल हैं जहाँ मनुष्य कुछ समय रूककर अपनी आगामी जीवन यात्रा की तैयारी करता हैं. महाभारत के अनुसार जीवन के चार आश्रम व्यक्तित्व और समाज के विकास की चार सीढ़ीयाँ हैं,जिन पर चढ़कर व्यक्ति परम ब्रम्ह को प्राप्त करता हैं. भारतीय संस्कृति के जो चार कर्तव्य (धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष ) हैं,इन कर्तव्यों के द्धारा समाज,परिवार,और व्यक्तित्व का विकास भी आश्रम व्यवस्था द्धारा ही संभव हैं.जब एक आश्रम में व्यक्ति सफल जीवन जीता हैं,तो उसका दूसरा आश्रम भी सफ़ल हो जाता हैं. मनुष्य जीवन को 100 वर्षों का मानकर चार आश्रमों में विभाजन किया हैं. आईए जानते हैं आश्रम और  आश्रम व्यवस्था की प्रासंगिकता और आश्रम...