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आँखो का सुखापन होनें पर ये उपाय करेंगे तो बहुत जल्दी आराम मिलेगा Dryness of Eye

आँखो का सुखापन होनें पर ये उपाय करेंगे तो बहुत जल्दी आराम मिलेगा  Dryness of Eye #1. आँखों का सुखापन क्या हैं   आंख जब हम  पलक झपकातें हैं,तो हमें आँखों में उपस्थित  पानी या आँसू की उपस्थिति के कारण पलकों में रगड़ महसूस नहीं होती किंतु जब किन्हीं कारणों से यही आँसू आँखों से सूख जातें हैं,तो हमें पलक झपकानें पर आँखों में रगड़ महसूस होती हैं. यही स्थिति आँखों के सुखापन के लियें जिम्मेदार होती हैं.और इसे ही आँखों का सुखना कहतें हैं. #2.लक्षण # १.बार - बार आँखें झपकाना. २.आँखों में सूखापन का अहसास होना. ३.आँखों में जलन होना. ४.आँखें लाल होना. ५.आँखें मलनें की बार - बार इच्छा होना. ६.आँखें बार - बार मलते रहना. ७.आँखों में सूजन. ८.कंकड़ या कचरा गिरनें का अहसास होना. ९.आँखों में लालिमा १०.तेज दर्द होना. ११.आँखों का छोटा होना. १२.धूप में निकलनें पर आँखें चौंधियाना. उपरोक्त स्थिति गंभीर होनें पर अंधेपन (Blindness) का खतरा भी पैदा हो सकता हैं. ////////////////////////////////////////////////////////////////...

एक देश एक चुनाव one nation one election

 एक देश एक चुनाव # एक देश एक चुनाव # भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं,और लोकतंत्र में चुनाव किसी त्योहार से कम नहीं होतें. किंतु कई राजनेता,बुद्धिजीवीयों का मानना हैं कि रोज़ - रोज़ देश में चुनाव होना लोकतंत्र और विकास के लिये शुभ सकेंत नहीं हैं.तो क्या देश में एकसाथ चुनाव होना चाहियें ? या नहीं होना चाहियें ? आईयें इस मामलें की पड़ताल करतें हैं :::  EVM #एक साथ चुनाव के पक्ष में ::: भारत की बड़ी राजनितिक पार्टी भाजपा (भारतीय जनता पार्ट़ी ) और कांग्रेस ( congress) एक साथ चुनाव करवानें वाली बहसों में सकारात्मक नजर आ रही हैं. ■सौरमंड़ल ■ भ्रष्टाचार के बारें में जाने इन दलों के राजनेताओं का भी मानना हैं कि बार - बार   चुनाव से देश हर समय चुनावी मोड़ पर रहता हैं.फलस्वरूप प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री, मंत्री,विधायकों,सांसदों आदि जिम्मेदार पदों पर बेंठें राजनेताओं को जनता के कार्य छोड़कर पार्ट़ी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करना पड़ता हैं. इसी प्रकार कई बुद्धिजीवी वर्गों का मानना हैं,कि एक साथ चुनाव लोकतांत्रिक प्रणाली के लिये शुभ संकेंत...

फ्रांस की क्रांति ,इसके कारण और परिणाम { what is Francis Revolution) #Cause#

फ्रांस की क्रांति {French Revolution} ••••• फ्रांस की क्रांति सन् 1789 - 1799 ई.के मध्य फ्रांस के इतिहास में सामाजिक और राजनितिक उथल - पुथल की अवधि थी .  फ्रांस की क्रांति एक दृश्य जिसके दोरान फ्रांस की सरकारी संरचना जो पहलें कैथोलिक पादरी और कुलीन वर्ग के लियें सामंतवादी विशेषाधिकारों और राजशाही पद्धति पर आधारित थी,में आमूल परिवर्तन हुआ और स्वतंत्रता, विधि सम्मत समानता,भातृत्व और नागरिकता पर आधारित हो गई.   #00.क्रांति के कारण (Causes of revolution) •••••               //// सामाजिक कारण //// ##.फ्रांस का समाज 3 वर्गों में विभाजित था. जिन्हें एस्टेट़ कहा जाता था. प्रथम एस्ट़ेट़ में केथोलिक पादरी ,दूसरें वर्ग में कुलीन ,वकील और 3 रे वर्ग में छोंट़े किसान,श्रमिक और छोट़ें व्यापारी सम्मिलित थें. ##.इन 3 एस्ट़ेट़ में से पहलें एस्ट़ेट़ को कुछ जन्मना अधिकार प्राप्त थें,जबकि तीसरा वर्ग जन्मना अभावग्रस्त था. ##.इस तीसरें एस्ट़ेट़ में उत्पन्न हुये अत्यंत प्रतिभाशाली लाँक,रूसों और मांटेस्क्यू ने समानता आधारित समाज का सपना दे...

भारत की जनजाति ::: भील (Tribes of India ::: BHEEL)

#1.भील जनजाति :::: भील जनजाति भारत की आदिम जनजाति हैं.भील शब्द द्रविड़ शब्द बिल्ल का रूपातंरण हैं,जिसका अर्थ हैं धनुष चूंकि यह जाति धनुष विधा में निपुण होती हैं,अत : इसी से इसका नाम भील पड़ा. भीलों का उल्लेख रामायण, महाभारत और पुराणों में भी मिलता हैं. वैदिक काल की अनार्य जातियों में शामिल निषाद में एक जाति भील भी थी. #2.भील जनजाति का भौगोलिक वितरण :::: यह जनजाति मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में पाई जाती हैं. मध्यप्रदेश के पश्चिमी जिलों झाबुआ, अलीराजपुर, धार,बड़वानी आदि जिलें इस जनजाति की बाहुल्यता वालें हैं. भील भारत की 3 री बड़ी जनजाति हैं.मध्यप्रदेश की यह सबसे बड़ी जनजाति हैं,जिसका कुल जनजाति जनसँख्या में 37.7% योगदान  हैं.(जनगणना 2011) # 3.भील जनजाति की शारीरिक विशेषता :::: भील  ठिगनें,बाल घुंघरालें,नाक चोड़ी और त्वचा का रंग ताम्बिया जैसी शारीरिक विशेषताओं से युक्त होतें हैं. अन्य जनजातियों की तुलना में भील सुंदर होतें हैं. यह जनजाति  प्रोट़ो आस्ट्रेलाइड़ परिवार का प्रतिनिधित्व करती हैं. #4.भीलों का निवास ::: भील...

अनूसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989( Anusuchit jati AUR Anusuchit Janjati (Atyachar nivaran) Adhiniam - 1989)

 sc st act •  भारतीय समाज में सदियों से पिछड़े और उपेक्षित वर्ग को समाज की मुख्य धारा में लानें तथा उन्हें शोषण से बचानें के लिये भारतीय संविधान में विशेष प्रावधान किये गये हैं. इन्ही मे से एक प्रावधान अनुच्छेद 17 में किया गया हैं,जिसके द्धारा अस्पृश्यता का अन्त किया गया हैं. • संवैधानिक उपबंधो के बावजूद अनूसूचित जाति एंव अनूसूचित जनजातियों के विरूद्ध होनें वाले अपराधों व उनके शोषण में उल्लेखनीय सुधार नही हो पाया. भारतीय संविधान के बारें में जानिये तत्पश्चात संसद द्धारा अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम पारित किया गया, जिसे संशोधित कर सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम - 1955 नाम दिया गया. लेकिन यह भी नाकाफी सिद्ध हुआ ,और सन् 1989 में संसद द्धारा अनूसूचित जाति और अनूसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम पारित किया गया. • अनूसूचित जातियों और अनूसूचित जनजातियों के सदस्यों पर अत्याचार का अपराध करने के निवारण करने के लिये ऐसे अपराधों के विचारण के लिये विशेष न्यायालय का तथा ऐसे अपराध से पीड़ित व्यक्तियों को राहत देने का और उनके पुनर्वास का तथा उससे संबधित या उनके आनुषांशिक विषय...

सिंधु घाट़ी सभ्यता (Indus velly civilisation) के पतन का कारण

सिंधु घाट़ी सभ्यता के पतन के कारण ::: विश्व की सबसे प्राचीन नदी घाट़ी सभ्यताओं में शामिल सिंधु घाट़ी सभ्यता लगभग 600 वर्षों तक फलीभूत होनें के पश्चात ईसा के लगभग 1700 वर्षों पूर्व नष्ट़ हो गई इसके नष्ट़ होनें के कई कारण रहें हैं जैसें भारतीय संविधान #1. प्राकृतिक कारण =: अनेक विद्धानों का मानना हैं कि यह सभ्यता प्राकृतिक आपदाओं जैसें महामारी,भयंकर आग,भूगर्भीय हलचल,नदियों का मार्ग परिवर्तन होनें,बाढ़ आदि की वज़ह से अपना मूल स्वरूप और आर्थिक आधार खो बैठी. #2. विदेशी आक्रमण =: अनेक विदेशी विद्धानों जैसें मार्शल,पिग्गट़ और व्हीलर का मानना हैं,कि आर्यों के आक्रमण ने हड़प्पा और मोहनजोदड़ों को नष्ट़ कर दिया. #3.आर्थिक कारण =: सिंधु घाट़ी सभ्यता (Indus velly civilisation) व्यापार केन्द्रित  सभ्यता थी जिसके साक्ष्य हमें अनेक सैंधव स्थलों से प्राप्त हुये हैं. व्यापार का शनै : शनै: पतन होनें से यह सभ्यता भी धिरे - धिरे नष्ट हो गई. इसी प्रकार कृषि उत्पादन में कमी से भी इसका पतन सुनिश्चित हो गया. # मानवीय कारण =: ...

बिटकाँइन (Bitcoin) क्या हैं भविष्य की मुद्रा या फिर बुलबुला :: एक विश्लेषण

## बिटकाँइन (Bitcoin) क्या हैं ::: वेदिक काल से लगाकर आज तक मनुष्य अपनी ज़रूरतों की वस्तु या पदार्थ क्रय करनें हेतू मुद्रा प्रणाली का उपयोग करता आया हैं.  बिटकाइन इसी मुद्रा प्रणाली से अर्थव्यवसथा का संचालन होता हैं.विभिन्न राष्ट्रों की अपनी - अपनी मुद्रा हैं,जैसें अमेरिका का ड़ालर $ ( Doller) ,जापान (Japan) का येन ¥ (yen) भारत का  ₹ रूपया आदि. इसी प्रकार से जापान के एक छद्म नाम के व्यक्ति सतोशी नाकामोतो  (Satoshi Nakamoto) ने इंटरनेट़ (Internet) पर एक आभासी Digital मुद्रा का निर्माण किया इसी छद्म या आभासी मुद्रा को बिट़काइन कहतें हैं. इसे क्रिप्ट़ोंकरेंसी (Cryptocurrince) भी कहतें हैं. ##  आभासी (virtual) से क्या आशय हैं ? आभासी (virtual) मुद्रा से तात्पर्य हैं,कि इस मुद्रा का कोई भौतिक (Physical) आकार नहीं हैं, अन्य मुद्राओं की तरह इसे छुआ नहीं जा सकता ,पर्स में नहीं रखा जा सकता बल्कि Digital vollet में खरीदकर रखा जाता हैं. ## इसका निर्माण कैसें होता हैं ? बिट़काइन ( Bitcoin)  निर्माण करनें की प्रक्रिया को बिट़काइन माइनिंग ( Bitco...