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संदेश

वेद ज्ञान

📚📒📋✒ *हमारे आर्य संस्कृति (हिंदु) का संक्षेप में संपूर्ण वैदिक ज्ञान:* 🛑 *वैदिक साहित्य* 🛡 *वेद किसे कहते हैं ?* ✒ *ईश्वर के उपदेश को वेद कहते हैं।* 🛡 *वेद का ज्ञान कब दिया गया था ?* ✒ *वेद का ज्ञान सृष्टि के आरंभ में दिया गया था।* 🛡 *ईश्वर ने वेद का ज्ञान किसे दिया था ?* ✒ *उत्तर: ईश्वर ने वेद का ज्ञान चार ऋषियों को दिया था।* 🛡 *हमारा धर्मिक ग्रन्थ कौन सा है ?* ✒ *हमारा धर्मिक ग्रन्थ वेद है।* 🛡 *हमें वेद को ही क्यों मानना चाहिए ?* ✒ *वेद ईश्वरीय ज्ञान है। वेद में सब सत्य बातें हैं, इसलिए वेद को ही मानना चाहिए।* 🛡 *वेद किस भाषा में है ?* ✒ *वेद संस्कृत भाषा में है।* 🛡 *क्या वेद ऋषियों ने नहीं लिखा है ?* ✒ *नहीं, वेद ऋषियों ने नहीं लिखा है।* 🛡 *उन ऋषियों के नाम बताइए जिन्हें वेद का ज्ञान प्राप्त हुआ ?* ✒ *उन ऋषियों के नाम हैं - अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा।* 🛡 *वेद पढ़नें का अधिकार किसे है ?* ✒ *उत्तर: सभी मनुष्यों को वेद पढ़ने का अधिकार है।* 🛡 *वेद ज्ञान किसने दिया ?* ✒ *ईश्वर ने दिया।* 🛡 *ईश्वर ने वेद ज्ञान क्यों दिया ?* ✒...

प्रतिदिन प्रात:स्मरणीय मन्त्र :: कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥

*प्रतिदिन स्मरण योग्य शुभ सुंदर मंत्र। संग्रह*  प्रतिदिन प्रात:स्मरणीय मन्त्र   *🔹 प्रात: कर-दर्शनम्🔹* कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥          *🔸पृथ्वी क्षमा प्रार्थना🔸* समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते। विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव॥ *🔺त्रिदेवों के साथ नवग्रह स्मरण🔺* ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥               *♥ स्नान मन्त्र ♥* गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥            *🌞 सूर्यनमस्कार🌞* ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्युषश्च आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥ ॐ मित्राय नम: ॐ रवये नम: ॐ सूर्याय नम: ॐ भानवे नम: ॐ खगाय नम: ॐ पूष्णे नम: ॐ हिरण्यगर्भाय नम: ॐ मरीचये न...

Healthy lifestyle quotes in Hindi

Healthy lifestyle quotes in Hindi ➰जिस दिन हमारी मौत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रह जाता है।➰ ➰जब हम जिंदा होते हैं, तो हमें लगता है कि हमारे पास खच॔ करने को पया॔प्त धन नहीं है।➰ ➰जब हम चले जाते है, तब भी बहुत सा धन बिना खच॔ हुये बच जाता है।➰ ➰एक चीनी बादशाह की मौत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डालर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नोकर से शादी कर ली। उस नोकर ने कहा, मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ, अब समझ आया कि वो हमेशा मेरे लिये काम करता था।➰         *➰सीख?➰* ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अज॔न कि बजाय अधिक जिया जाय। • अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये। • मँहगे फोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है। • मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता। • आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है। • पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं। • पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है। • 70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता। *➰तो 30% का पूण॔ उपयोग कैसे हो!➰* • स्वस्थ होने पर भी निरंतर चेक-अप करायें।...

कुछ उपयोगी जानकारी

❇ *सब बीमारी का एक इलाज*❇ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 गौमुञधनसत्व    20 gms  गंधर्व हरितकी    350 gms  अजवाइन.         20 gms  मुलेठी               50 gms  सौंठ.                20 gms  उपर बताइ गइ सभी चिजे पंसारी से एवं गौमुञ धनसत्व ( गौमुञ भस्म) आपको कीसी गौशाला से प्राप्त होगी सभी को मिक्स करके चूरन बनाले|                        रात्रि को सोते समय चम्मच पावडर एक गिलास पूरा गुनगुने पानी के साथ लेना है।  गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है।  यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है। चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी ।  पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा ।  चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जाएग...

आयुर्वैदिक तेल और उनके फायदे

1 महाभृंगराज तेल : सिर पर इसकी धीरे-धीरे मालिश करने पर यह बालों का गिरना बंद करता है और गंजापन समाप्त कर बालों को बढ़ाने में मदद करता है।  असमय सफेद हुए बालों को काला करने के साथ ही यह सिर की गर्मी को शांत कर माथे को ठंडा करता है। 2  नारायण तेल : सब प्रकार के वात रोग, पक्षघात (लकवा), हनुस्म्भ, कब्ज, बहरापन, गतिभंग, कमर का दर्द, अंत्रवृद्धि, पार्श्व शूल, रीढ़ की हड्डी का दर्द, गात्र शोथ, इन्द्रिय ध्वंस, वीर्य क्षय, ज्वर क्षय, दांतों के रोग, पंगुता आदि के लिए यह एक प्रसिद्ध औषधि है।  दो-तीन बार पूरे शरीर में मालिश करना एवं 1 से 3 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ पीना फायदेमंद है। 3 चंदनबला लाशादि तेल : इसके प्रयोग से शरीर की सातों धातुओं में वृद्धि होती है एवं वात विकार नष्ट होते हैं।  कास, श्वास, क्षय, शारीरिक क्षीणता, दाह, रक्तपित्त, खुजली, शिररोग, नेत्रदाह, सूजन, पांडू व पुराने ज्वर में यह बेहद उपयोगी है।  दुबले-पतले शरीर को पुष्ट करता है एवं बच्चों के लिए सूखा रोग में लाभकारी है। सुबह व रात्रि को इसकी मालिश करना लाभकारी है।      ...

१०० swasthprad jankariya

*आयुर्वेद से कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए* 1योगभोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2 *लकवा*  सोडियम की कमी के कारण होता है । 3 *हाई वी पी में*   स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4 *लो बी पी*  सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5 *कूबड़ निकलना* फास्फोरस की कमी । 6 *कफ*  फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है   फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं  7 *दमा अस्थमा*  सल्फर की कमी । 8 *सिजेरियन आपरेशन*  आयरन  कैल्शियम की कमी । 9 *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* । 10 *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* । 11 *जम्भाई* शरीर में आक्सीजन की कमी । 12 *जुकाम*  जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13 *ताम्बे का पानी*  प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14  *किडनी*  भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15 *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसक...

ॐ उच्चारण करने के 11 शारीरीक लाभ

*"ॐ" के उच्चारण के 11 शारीरिक लाभ:*  Om *ॐ* ओउम् तीन अक्षरों से बना है। जिनमें है क्रमशः अ उ म्। *"अ"* का अर्थ है उत्पन्न होना, *"उ"* का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, *"म"* का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना। *ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।* *ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।* ॐ का उच्चारण कैसे स्वास्थ्यवर्द्धक और आरोग्य के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। *उच्चारण की विधि* प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें।  ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं।  इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं। *01) ॐ और थायराॅयडः* ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। *02) ॐ और घबराहटः-* अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं। *03) ॐ और त...