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न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर [Neuro Endocrine Tumour] #

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न्यूरों एंड़ोक्राइन ट्यूमर (Neuro Endocrine Tumour) एक प्रकार का ट्यूमर हैं.

यह ट्यूमर मनुष्य की उन अंत:स्त्रावी ग्रंथी में होता हैं,जिनका कार्य हार्मोंन उत्पादन करना और उस हार्मोंन को रक्त के माध्यम से शरीर के दूसरें भागों में पहुँचाना होता हैं.

# यह ट्यूमर शरीर के किन हिस्सों को प्रभावित करता हैं ?

यह ट्यूमर शरीर के हार्मोंन उत्पादित करनें करनें वाली अंतस्त्रावी ग्रंथियों जैसें पेट,आंत ,फेफड़ें,मस्तिष्क आदि की कोशिकाओं में पैदा होता हैं.

# न्यूरो एंडोक्राइन कितनें प्रकार का होता हैं?


न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर 3 प्रकार के होतें हैं :::


#१.फियोक्रोमा साइटोमा (Fiocroma Cytoma)


#२.मर्केल सेल (Merkel Cell)


#३.न्यूरो एंड़ोक्राइन कार्सिनोमा (Neuro Endocrine Carcinoma)


# क्या यह जानलेवा बीमारी हैं ?


यह ट्यूमर जानलेवा भी हो सकता हैं और नहीं भी हो सकता हैं.चिकित्सक परीक्षण उपरांत ही यह बता सकतें हैं कि संबधित ट्यूमर बिनाइन ( जो ट्यूमर बिना किसी वृद्धि के शरीर में पड़ा रहता हैं) हैं या मैलिंग्नेट ( जो लगातार वृद्धि कर शरीर के दूसरें अंगों तक फैल जाता हैं और प्रा्णघातक होता हैं) जानलेवा हैं या नहीं.


# न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर किसे हो सकता हैं?

इस कैंसर के होनें का स्पष्ट़ कारण अभी तक चिकित्सा विज्ञानियों को  नही पता हैं.किंतु कुछ ऐसे केस  सामनें आये हैं जिनसें पता लगता हैं,कि किसे यह कैंसर किसे हो सकता हैं जैसें --

#१.न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर का पारिवारिक इतिहास यानि आनुवांशिकता इस बीमारी के होनें के लियें जिम्मेदार मानी जाती हैं.

#२.यह देखा जा रहा हैं,कि यह ट्यूमर महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों को अधिक प्रभावित करता हैं.ऐसा शायद इसलिये होता होगा क्योंकि कि पुरूषों में हार्मोंनल सक्रियता महिलाओं से ज्यादा होती हैं.

#३.40 से 60 वर्ष के पुरूष इस बीमारी से सर्वाधिक प्रभावित होतें हैं.

#४.अनियमित जीवनशैली भी न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर पैदा होनें के सर्वप्रमुख कारणों में से एक हैं.

# न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर के लक्षण


न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर के लक्षण अन्य ट्यूमर जनित बीमारीयों के समान ही होतें हैं जैसें :::

#१.दिमाग में होनें पर चक्कर आना,उल्टी होना आदि

#२.पेट़ में होनें पर कब्ज, भूख नही लगना आदि.

#३.आंतों में होनें पर पेटदर्द,मरोड़ आदि लक्षण

#४.फेफडों में होनें पर खाँसी होना,बलगम बनना,फेफडों में जकड़न आदि लक्षण

ये वह लक्षण हैं जो सामान्य चिकित्सतकीय उपचार के बाद भी लम्बें समय से ठीक नहीं हो रहें हो.

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# न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर के लिये परीक्षण 


न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर के लिये 'क्रोमोग्राफिन ऐसे ' ( Cromografin esse) और 'क्रोमेटिन टेस्ट'(Crometine Test)किया जाता हैं.

इस टेस्ट से ही पता चलता हैं,कि ट्यूमर प्रथम अवस्था में हैं ,द्धितीय अवस्था में हैं,या फिर तृतीय अवस्था में हैं.

# न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर का उपचार


न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर का इलाज कैंसर की अवस्था के आधार पर किया जाता हैं,यदि ट्यूमर बिनाइल प्रकार का हैं,तो सामान्य सर्जरी या दवाईयों से ठीक किया जा सकता हैं.

यदि ट्यूमर मैलिग्नेंट़ प्रकार का हैं,तो इस की अवस्था के आधार पर विशेषज्ञ निर्णय लेतें हैं,कि रेड़ियेशन थैरपी देना हैं,किमोंथेरेपी देना हैं,या विशिष्ट़ सर्जरी करना हैं.

# न्यूरो एंड़ोक्राइन ट्यूमर होनें पर क्या करें क्या न करें 


१.कोई भी बीमारी चाहें वह कितनी भी जट़िल क्यों न हो मनुष्य के साहस से बड़ी नही हो सकती अत: बीमारी से लड़नें का साहस सदैव बनायें रखें.

२.समय पर दवाईयों की खुराक ज़रूर लें.

३.डाँक्टर ने जब - जब परीक्षण के लिये बुलाया हैं तब अवश्य करके जायें.

४.डाँक्टर और डायटिशियन द्धारा दी गई प्रत्येक सलाह की पालना अवश्य करें.

५.लगातार बीमारी के बारें में चिंतित  होनें की बजाय धार्मिक और आध्यात्म की ओर ध्यान केंद्रित करें.इससे इच्छाशक्ति मज़बूत बनती हैं.

६.बीमारी समाप्त होनें के बाद भी डाँक्टर की सलाह पर होनें वालें समयावधि परीक्षण अवश्य करवायें.

७.काम से छुट्टी लेनें की बजाय चिकित्सतकीय सलाह से अपनें व्यावसायिक कार्यों को करतें रहें इस दोरान जरूरी दवाईंया साथ में रखें.


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