सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

नपुंसकता क्या है

               नपुंसकता क्या है


🔸व्यस्त जीवनशैली, ग़लत खानपान, शरीर में पोषक तत्वों की कमी और बचपन की ग़लत आदतों के कारण पुरुषों में मर्दाना कमज़ोरी होना एक आम तकलीफ़ है। नपुसंकता यानि Impotence एक ऐसी सेक्शुअल प्रॉब्लम है जिसके कारण पुरुष को अपनी महिला पार्टनर के साथ शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी के कारण व्यक्ति महिला साथी से दूर रहने लगता है और दामपत्य जीवन का आनंद नहीं ले पाता है। सेक्स लाइफ़ में इस अधूरेपन के कारण मनमुटाव और तलाक़ तक की नौबत आ जाती है।



🔸कई बार नपुंसकता शारीरिक समस्या न होकर मनोवैज्ञानिक होती है। अक्सर कई पुरुष घबराहट, शर्म, मानसिक बीमारी या किसी डर के कारण समय पर उत्तेजित नहीं हो पाते हैं। इसी वजह से वो अपनी पार्टनर के क़रीब नहीं जाते हैं। इस तरह शारीरिक कमी न होते हुए भी यह तकलीफ़ आपको नपुंसकता का भार दे देती है।


🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                      *नपुंसकता क्या है?*

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

🔹पुरुष के लिंग में उत्तेजना न आना, उत्तेजना आने के बाद जल्दी शांत हो जाना या फिर वीर्य जल्दी स्खलित हो जाना नपुंसकता का रोग है।


🔹जिन पुरुषों में सेक्स करने की इच्छा के लिए उत्तेजना नहीं होती है वो पूरी तरह नपुंसक होते हैं। लेकिन जो पुरुष उत्तेजना के बाद किसी घबराहट या किसी अन्य वजह से जल्दी स्खलित हो जाते हैं, उन्हें आंशिक नपुंसक कहते हैं।


🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                    *नपुंसकता के कारण*

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂


*नपुंसकता दो कारणों से होती है –* शारीरिक और मानसिक। ज़्यादा तनाव लेना, चिंता करना, मानसिक विकार जैसे डिप्रेशन और शारीरिक कमज़ोरी भी नपुंसकता के लिए ज़िम्मेदार है। इसके अतिरिक्त और भी नपुंसकता के कारण हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं:


▪हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और हृदय रोग जैसी बीमारियों के कारण नपुंसकता हो सकती है।


▪शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हुए भी हार्मोंस में बदलाव नपुंसकता का कारण बन जाता है।


▪दुर्घटना के किसी नस के कटने या मेरुदंड में चोट लगने से भी इम्पोटेंस की समस्या हो सकती है।


▪स्टेरॉयड लेने से कोई भी व्यक्ति इम्पोटेंट हो सकता है। अक्सर वर्कआउट करने वाले और खिलाड़ी अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए स्टेरॉयड लेते हैं, जो कि एक ग़लत बात है। इससे वो जीवन भर के लिए नपुंसक हो सकते हैं। इसलिए इसका सेवन करने से बचना चाहिए। लगातार इसके प्रयोग से वीर्य और शुक्राणु बनना बंद हो जाते हैं।


▪आज बहुत से लोग लैपटॉप को अपने प्राइवेट पार्ट यानि यौन अंगों के क़रीब रखकर इस्तेमाल करते हैं। लैपटॉप से निकलने वाली गर्मी भी इम्पोटेंस का कारण बन सकती है। इसलिए टेबल पर बैठकर काम करने की आदत डालिए।


▪हस्तमैथुन की आदत हो जाने और स्वप्न दोष का इलाज न करने से भी शुक्राणुओं की संख्या घट सकती है।


🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                     *नपुंसकता के लक्षण*

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂


▪संभोग के समय जल्दी स्खलित हो जाना।


▪अपने पार्टनर से सेक्स करने की बात सोचकर ही स्खलित हो जाना या नाइटफ़ॉल अधिक होना नपुंसकता की निशानी है।


▪संभोग के समय लिंग शिथिल रहना या उसका देर तक कठोर न रहना।


🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                

               🙏🏻 *जागरूक रहें स्वस्थ रहें* 🙏🏻

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                     *इम्पोटेंस हेल्थ टिप्स*

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

▪हमारे समाज में जब दम्पत्ती को कई सालों तक बच्चा नहीं होता है तो इसके लिए स्त्री को दोषी माना जाता है। समाज में उसे लोग बांझ कहकर बुलाने लगते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक सर्वे के मुताबिक इस तरह के मामलों में फ़ीमेल इनफ़र्टिलिटी के मुक़ाबले मेल इनफ़र्टिलिटी अधिक होती है। इसलिए नपुंसकता के कारण जानना आवश्यक है।

▪अगर आपको नपुंसकता के बारे में संदेह है तो आप तुरंत डॉक्टरी परामर्श लें। ऐसे मामलों में देसी प्राकृतिक घरेलू उपचार और आयुर्वेदिक उपाय बहुत लाभदायक होते हैं। इनसे आशातीत परिणाम मिलते हैं और साइड इफ़ेक्ट भी नहीं होते हैं। एक्सरसाइज़ और प्राकृतिक हरियाली के नज़दीक़ घूमने से काफ़ी फ़ायदा मिलता है।

▪इम्पोटेंस की प्रॉब्लम उम्र बढ़ाने के साथ साथ भी आती है। साथ ही साथ यौन इच्छा में भी कमी होने लगती है।

▪वीर्य में स्पर्म काउंट घट जाने से पुरुष बच्चा पैदा करने में असक्षम हो जाता है और पिता नहीं बन पाता है।

🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂

                      *वायाग्रा है खतरनाक


🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂


नपुंसकता को छिपाने के लिए कई लोग वायाग्रा का प्रयोग करते हैं। जिसका काफी खतरनाक साइड इफेक्ट हो सकते हैं आपको हार्ट पेशेंट भी बना सकती है इस के इलाज के लिए आप किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं

♻♻♻♻♻♻♻♻♻♻

नपुंसकता क्या है


० गिलोय के फायदे


० पारस पीपल के औषधीय गुण

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Corona third wave : से बचने के सबसे बेस्ट तरीके

corona third wave की आहट सुनाई देने लगी हैं और इस corona third wave की चपेट में वो लोग अधिक हैं जिन्होंने corona vaccine की दोनों डोज लगवा ली हैं। दोस्तों एक बात समझना बहुत जरूरी हैं कि कोराना अब आपके बीच बहुत लम्बें समय तक रहने वाला हैं यह अब आप पर निर्भर करता हैं कि आप इस वायरस के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं या फिर कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता के साथ कोरोना को आप पर हावी करवाना चाहते हैं। यदि कोरोनावायरस को खतरनाक वायरस से सामान्य फ्लू वायरस के रुप में बदलना हैं तो आपको प्राचीन आयुर्वेद जीवनशैली को हर हाल में अपनाना ही पड़ेगा। तो आईए जानतें हैं 8 बेस्ट तरीकों के बारें में 1.सुबह शाम दोड़ना शुरू करें कोरोनावायरस सबसे ज्यादा श्वसन तंत्र पर हमला करता हैं,कोरोना की दूसरी लहर में में अनेक लोग श्वसन तंत्र फैल हो जानें से मरें थे। ऐसा corona third wave  में न हो इसकी तैयारी हमें पहले से ही करना है।  मैंने अपने निजी अनुभव से देखा हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में खिलाड़ीयों को कोरोना के हल्के लक्षण ही प्रकट हुए थे और कोई भी खिलाड़ी गंभीर रूप से श्वसन तंत्र के संक्रमण से प्रभावित ...

Beauty tips: सर्दियों के लिए ये ब्यूटी टिप्स बहुत काम आएंगे

सर्दियाँ शुरू होतें ही बर्फीली हवाएं त्वचा को रूखा करना शुरू कर देती हैं यदि त्वचा का सही देखभाल इस दोरान नही की गई तो त्वचा को काफी नुकसान पंहुच सकता हैं और त्वता कठोर, फटी फटी सी ,काली झाइयुक्त हो जाती हैं जिसें बाद में सामान्य रूप में बदलना बहुत मुश्किल होता हैं । तो आईयें जानतें हैं 4 miracles ways to look Beautiful In Winter In Hindi ब्यूटी टिप्स सर्दियों में त्वचा की देखभाल कैंसे करें  सर्दियों में ब्यूटी टिप्स 1.सर्दियों में चेहरें की त्वचा की देखभाल कैंसें करें  सर्दियाँ शुरू होतें ही सबसे पहलें यदि कोई त्वचा फटती हैं तो वह हे चेहरे की त्वचा  बहुत नाजुक और संवेदनशील होती हैं । इसलिए इसकी देखभाल भी उसी अनुरूप करनी होती हैं ।  सर्दियाँ शुरू होतें ही चेहरें पर भाप लेना शुरू कर दें ऐसा पूरी सर्दी के दोरान तीन चार बार करें इससे चेहरें की त्वचा पर स्थित मृत कोशिकाएँ आसानी से निकल जाएंगी और स्वस्थ कोशिकाएँ भाप से मुलायम हो जाएगी फलस्वरूप सर्द हवाओं के कारण चेहरें की त्वचा रूखी नही रहेगी ।  सर्दियाँ शुरू होतें ही अच्छी कंपनी के माश्चुराजर साबुन या माश्चुराइ...

*पेट के रोग*

*पेट के रोग* *👉🏻(कब्ज) (वायुविकार, अजीर्ण) हमारे द्वारा भोजन ग्रहण करने के बाद उसका पाचन संस्थान द्वारा पाचन होता है। मुँह में ग्रास के चबाने के साथ ही पाचन क्रिया की शुरूआत हो जाती है। उसके बाद ग्रास नली द्वारा आमाशय में पहुँच कर भोजन के पचने की क्रिया आरंभ होती है। अगर इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट होती है। तो फिर भोजन सही ढंग से नहीं पचता तथा अपच होती है और फिर कब्ज होती है। सही ढंग से मल का न निकलता ‘कब्ज़' कहलाता है यह रोग अधिक तनाव के कारण भी होता है। देर रात तक जागने, भोजन कम करने या ज्यादा तला भुना या चिकना भोजन करने से या किसी बिमारी के कारण भी हो सकता है। शोक, दुख, चिन्ता के कारण भी कब्ज हो जाता है। इसमें पेट में गैस बनने लगती है। हवा पास नहीं होती, खट्टी डकारें आती हैं तथा जी मिचलाने लगता है। इसके घरेलु उपचार निम्न हैं।* 1. अदरक की चटनी नमक मिलाकर चाटने से गैस पास होने लगती है। अदरक के रस में नींबू और पुदीने का रस मिलाकर पीने से रोग में आराम मिलता है यदि अवश्यक लगें तो एक दो चम्मच शहद भी मिला सकते हैं।  2. सौंठ + कालीमिर्च + पीपल को बराबर मात्...