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प्रातः विचार पुष्प

🌻🌞🌻🌞🌻🌞🌻🌞🌻 जय श्री कृष्ण प्रातः विचार पुष्प *सर्वार्थसंभवो देहो जनित: पोषितो यत: ।* *न तयोर्याति निर्वेशं पित्रोर्मत्र्य: शतायुषा ॥* एक सौ वर्ष की आयु प्रााप्त हुआ मनुष्य देह भी अपने माता पिता के ऋणोंसे मुक्त नही होता । जो देह चार पुरूषार्थोंकी प्रााप्ती का प्रामुख साधन है, उसका निर्माण तथा पोषण जीन के कारण हुआ है, उनके ऋण से मुक्त होना असंभव है । अर्थात मनुष्य कुछ भी कर ले माता पिता के ऋण से कभी मुक्त नही हो सकता उसका दायित्व है कि वो जिंदगी भर उनकी सेवा में रत रहे।व्यक्ति चार धाम की यात्रा कर ले, कितना भी नाम, धन, कमा ले , कितनी भी प्रतिष्ठा प्राप्त कर ले अगर माता पिता की सेवा का सौभाग्य उसे नही मिलता तो उसका जन्म बेकार है यह समझना चाइए। आपका दिन शुभ मंगलमय हो। 🌻🌞🌻🌞🌻🌞🌻🌞🌻🌞🌻 🌸🍀🌸🍀🌸🍀🌸🍀🌸🍀 जय श्री कृष्ण प्रातः विचार पुष्प *सर्वं परवशं दु:खं सर्वम् आत्मवशं सुखम् ।* *एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुख-दु:खयो: ॥* जो चीजें अपने अधिकार में नहीं है वह दु:ख से जुडी है, लेकिन सुखी रहना तो अपने हाथ में है ।  आलसी मनुष्य को ज...

*पेट के रोग*

*पेट के रोग* *👉🏻(कब्ज) (वायुविकार, अजीर्ण) हमारे द्वारा भोजन ग्रहण करने के बाद उसका पाचन संस्थान द्वारा पाचन होता है। मुँह में ग्रास के चबाने के साथ ही पाचन क्रिया की शुरूआत हो जाती है। उसके बाद ग्रास नली द्वारा आमाशय में पहुँच कर भोजन के पचने की क्रिया आरंभ होती है। अगर इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट होती है। तो फिर भोजन सही ढंग से नहीं पचता तथा अपच होती है और फिर कब्ज होती है। सही ढंग से मल का न निकलता ‘कब्ज़' कहलाता है यह रोग अधिक तनाव के कारण भी होता है। देर रात तक जागने, भोजन कम करने या ज्यादा तला भुना या चिकना भोजन करने से या किसी बिमारी के कारण भी हो सकता है। शोक, दुख, चिन्ता के कारण भी कब्ज हो जाता है। इसमें पेट में गैस बनने लगती है। हवा पास नहीं होती, खट्टी डकारें आती हैं तथा जी मिचलाने लगता है। इसके घरेलु उपचार निम्न हैं।* 1. अदरक की चटनी नमक मिलाकर चाटने से गैस पास होने लगती है। अदरक के रस में नींबू और पुदीने का रस मिलाकर पीने से रोग में आराम मिलता है यदि अवश्यक लगें तो एक दो चम्मच शहद भी मिला सकते हैं।  2. सौंठ + कालीमिर्च + पीपल को बराबर मात्...

किस देवता को कौन से फूल चढ़ाए??????

किस देवता को कौन से फूल चढ़ाए?????? हिंदू धर्म में विभिन्न धार्मिक कर्म-कांडों में फूलों का विशेष महत्व है। देव पूजा विधियों में कई तरह के फूल-पत्तों को चढ़ाना बड़ी ही शुभ माना गया है। धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आरती आदि कार्य बिना पुष्प के अधूरे ही माने जाते हैं।  कुछ विशेष फूल देवताओं को चढ़ाना निषेध होता है। किंतु शास्त्रों में ऐसे भी फूल बताए गए हैं, जिनको चढ़ाने से हर देवशक्ति की कृपा मिलती है यह बहुत शुभ, देवताओं को विशेष प्रिय होते हैं और हर तरह का सुख-सौभाग्य बरसाते हैं। कौन से भगवान की पूजा किस फूल से करें, इसके बारे में यहां संक्षिप्त जानकारी दी जा रही है। इन फूलों को चढ़ाने से आपकी हर मनोकामना शीघ्र ही पूरी हो जाती है। हमारे जीवन में फूलों का काफी महत्व है। फूल ईश्वर की वह रचना है, जिसकी खुशबू से हमारे घर की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। इसकी खुशबू मन को शांति देती है। वैसे तो भगवान भक्ति के भूखे हैं, लेकिन हमारे देश में भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनपर उनके प्रिय फूलों को चढ़ाने की मान्यता भी है।  कहा जाता है कि भगवान के पसंदीदा रंगों के आधार मानकर उ...

नपुंसकता क्या है

               नपुंसकता क्या है 🔸व्यस्त जीवनशैली, ग़लत खानपान, शरीर में पोषक तत्वों की कमी और बचपन की ग़लत आदतों के कारण पुरुषों में मर्दाना कमज़ोरी होना एक आम तकलीफ़ है। नपुसंकता यानि Impotence एक ऐसी सेक्शुअल प्रॉब्लम है जिसके कारण पुरुष को अपनी महिला पार्टनर के साथ शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी के कारण व्यक्ति महिला साथी से दूर रहने लगता है और दामपत्य जीवन का आनंद नहीं ले पाता है। सेक्स लाइफ़ में इस अधूरेपन के कारण मनमुटाव और तलाक़ तक की नौबत आ जाती है। 🔸कई बार नपुंसकता शारीरिक समस्या न होकर मनोवैज्ञानिक होती है। अक्सर कई पुरुष घबराहट, शर्म, मानसिक बीमारी या किसी डर के कारण समय पर उत्तेजित नहीं हो पाते हैं। इसी वजह से वो अपनी पार्टनर के क़रीब नहीं जाते हैं। इस तरह शारीरिक कमी न होते हुए भी यह तकलीफ़ आपको नपुंसकता का भार दे देती है। 🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂                       *नपुंसकता क्या है?* 🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 🔹पुरुष के लिंग में उत्तेजना न आना...

*मौत के मुख से बाहर लाने वाली आैषधी बन सकती है यह औषधी- दिव्य चमत्कारी औषधी कलौंजी* ⏺

⏺ *मौत के मुख से बाहर लाने वाली  औषधी बन सकती है यह औषधी- दिव्य चमत्कारी औषधी कलौंजी* ⏺      कलोंजी कलौंजी काले रंग के छोटे दाने होते है जिसको आेनियन के बीज यानी कांदे के बीज कहा जाता है इसकी तासीर गरम होती है लेकीन यह आयुर्वेद मे गुणो का भंडार कहां गया है आैर मौत को छोडकर लगभग हर रोग का इलाज मानां गयां है आैर वह असाध्य रोगो को भी ठीक  करने की क्षमता रखती है |  ० अरहर के औषधीय प्रयोग ० प्याज के औषधीय उपयोग ० नीम के औषधीय उपयोग ० कद्दू के औषधीय उपयोग ० तेल के फायदे ० गौमुखासन *आइये जानते है कैसे बनता है कलौंजी का काढ़ा -* 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 २ चम्मच कलौंजी और २ ग्लास पानी मिलाकर धीमी आंच पर पकाये जब आधा ग्लास पानी बचे तब ठंडा होने पर छानकर पीनां है  जानते है किस  रोग मे है उपयोगी जानने के लिये पूराल अवश्य पढे़ -  ⏺ घाव भरती है*⏺ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 अगर आपको कोइ चोट लगी है आैर काफी लम्बे समय से घाव नही भर रहा तो कलौंजी को पीसकर लैप करिये थोडे दिनमे धांव भर जायेगा | ⏺ *शुगर मे उपयोगी*⏺ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 डायाबिटीस...

*100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

*100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए* 1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है। 2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. *हाई वी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी । 6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है गुड व शहद खाएं  7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी । 8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* । 10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* । 11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14.  *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये । 15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेसटेन्स अधिक होता है । गिलास अंग्रेजो (...

पार्किसन रोग क्या है

पार्किंसन रोग क्या है पार्किंसन रोग तंत्रिका तंत्र का एक तेजी से फैलने वाला विकार है, जो आपकी गतिविधियों को प्रभावित करता है। यह धीरे-धीरे विकसित होता है। यह रोग कभी-कभी केवल एक हाथ में होने वाले कम्पन के साथ शुरू होता है। लेकिन, जब कंपकपी पार्किंसन रोग का सबसे मुख्य संकेत बन जाती है तो यह विकार अकड़न या धीमी गतिविधियों का कारण भी बनता है। पार्किंसन रोग के शुरुआती चरणों में, आपके चेहरे के हाव भाव कम या खत्म हो सकते हैं या चलते समय आपकी बाजुएं हिलना बंद कर सकती हैं। आपकी आवाज़ धीमी या अस्पष्ट हो सकती है। समय के साथ पार्किंसन बीमारी के बढ़ने के कारण लक्षण गंभीर हो जाते हैं। 🔹 *पार्किंसन रोग के लक्षण इस रोग के लक्षण और संकेत हर व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं। शुरुआती संकेत कम हो सकते हैं और आसानी से किसी का ध्यान  अपनी तरफ आकर्षित नहीं करते हैं। इसके लक्षण अक्सर आपके शरीर के एक तरफ के हिस्से पर दिखने शुरू होते हैं और स्थिति बहुत खराब हो जाती है।  ▪ *कंपन –* कंपकपाना या हिलना आमतौर पर आपके हाथ या उंगलियों से शुरू होता है। इसके कारण आपका  अंगूठा और तर...