सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बबूल के औषधीय गुण अनेक । Benefit of acacia tree in Hindi

बबूल के औषधीय गुण Benefit of acacia tree in Hindi




बबूल पेड़ के फायदे
बबूल पेड़


बबूल का पेड़ वैसे तो सम्पूर्ण भारत मेें पाया जानें वाला उष्णकटिबंधीय वृक्ष हैं ।किन्तु पश्चिमी भारत विशेेेेषकर राजस्थान ,मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश  आदि  प्रदेशों में यह वृृक्ष बहुतायत में  मिलता है ।

बबूल का पेड़ मध्यम कद का  होता हैं । बबूल के पत्ते छोटें छोटें आँवले के पत्तो के समान होतें हैैं ।

बबूल के कांटे  बहुत तीक्ष्ण और मज़बूत होतें हैं बबूल के कांटें दो - दो के जोड़े मेंं लगतें हैं । 


बबूल के फूल पीले रंग के होतें हैं। बबूल की फलियाँ इमली के समान लम्बाई वाली होती हैं ।


बबूल के पेड़ से गोंद भी प्राप्त होता हैं ।  बबूल की लकड़ी बहुत कठोर और लम्बे
समय तक  टीकाऊ होती हैैं ।

बबूल का संस्कृत नाम 



बबूल को संस्कृत में बर्बूर ,बब्बूल ,कफांतक ,स्वर्णपुष्प ,और मालाफल कहतें हैं।

बबूल का हिन्दी नाम acacia tree in hindi


बबूल को हिन्दी मेें बबूल ,बबूर और कीकर नाम से पुकारतें हैं ।


बबूल का लेटिन नाम 


बबूल को लेटिन भाषा मेें माइमोसा अरेबिका कहतें हैं ।


आयुर्वेद मतानुुुुसार बबूल की प्रकृति 

 आयुर्वेद मतानुसार बबूल कड़वा ,स्निग्ध ,शीतल होता हैं ।


बबूल का औषधीय उपयोग 


1.दस्त  में 



बबूल के गोंद को 30 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे 100 मिलीलीटर पानी मेंं गला देें । इस पानी को दिन में तीन चार बार पीलायें । दस्त बंद करने की घरेलू दवा इससे उत्तम नही हैं ।

2.दाँतदर्द 

बबूल बहुत उत्तम दाँतदर्द निवारक औषधी हैं । बबूल की टहनी से दातुन करनेें वाले व्यक्ति के दाँतदर्द मेें तुरंत आराम मिलता हैं । और दांत मजबूत और चमकदार बनतें हैैं । 


यदि दाँत सड़ रहे हो तो बबूल की फली को जलाकर इसे राख बना ले और इसमें नमक मिलाकर मंजन करनें से सड़़े दाँत का और अधिक क्षरण नही होता हैं ।

3.नेत्रपीड़ा 


बबूल के पत्तें जो नरम हो ऐसे आठ दस पत्तें लेकर उनका रस निकाल ले इस रस में इतना  ही शहद मिलाकर आँखों पर अंजन करें आँखों के दर्द में बहुुुत तेेेजी से आराम मिलता हैं ।


4.बाजीकारक 


बबूल की छाल ,फल और गोंद बहुत उत्तम बाजीकारक औषधी हैं । 

यदि बबूल केे गोंद को प्रतिदिन चने के दाने बराबर लेकर चूसा जायें  तो इंसान कुुछ ही दिनों मेंं  घोडे जैसा शक्तिशाली बन जाता हैं । उसकी मैथुन करनेें की क्षमता दुगनी हो जाती हैैं । वीर्य स्खलन  का समय  लम्बा हो जाता हैं ।


5.शुक्राणुओं की वृद्धि 


बबूल की फली 500 ग्राम और 300 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण आपस में मिला लें यह चूर्ण आधा चम्मच प्रतिदिन केे हिसाब से रात्रि में सोते वक्त सेवन करनें से व्यक्ति के वीर्य मेें शुक्राणुओं की सँख्या बढ जाती हैं ।


6.श्वेत प्रदर


बबूल की छाल का क्वाथ बनाकर इसमें थोडी सी फिटकरी डाल ले और इस क्वाथ से योनि को धोंये।
श्वेत प्रदर मेें आराम मिलता हैं ।


7.टूटी हड्डी जोडनें में


बबूल टूटी हड्डी जोड़नें की सर्वमान्य आयुर्वेदिक औषधी हैं जो लम्बेेे समय से वनवासीयों द्धारा उपयोग की जा रही हैं ।

बबूल के बीजों का चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण के साथ शहद मिलाकर सुबह शाम चाटनें से टूटी हड्डी जुूूूड़़ जाती हैं ।

8.चर्म रोंग मेें

बबूल के गोंद को पानी में पीसकर दाद खाज पर लगानें से दाद खाज में आराम मिलता हैं ।


9.बिच्छू कााटनें पर

बबूल के गोंंद को गरम कर बिच्छू काटनें वाले डंक पर चिपका दे इस  विधि से  बिच्छछू का जहर कुुछ ही क्षण में उतर जाता हैं ।


 10.मुुँह के छाले


बबूल के पत्तों का रस मुहँ में भरकर कुल्ला करनें से मुँह के छालेंं ठीक हो जातें हैंं।

बबूल के गोंंद को मुंह में लेकर चूसनें से मुँह के छाले की जलन कम होकर बहुत शीीघ्रता सेे ठीक होतेें हैं ।

11. रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानें में


बबूल की छाल को रातभर पानी में भिगोकर सुबह इस पानी से स्नान करनें से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़़ती हैं ।

12.कुपोषण 

बबूल की फली ,गोंद ,पत्तियाँ छाल सभी पोषण से भरपूर होतें हैं इनकोो खानें कुुुपोषण बहुत शीीघ्रता सेे दूर होताा हैं ।

13.रक्तस्त्राव  रोकने में

बबूल के फूल रक्तस्त्राव रोकने की बहुत उत्तम आौैषधि हैं । यदि कटनें से रक्त नह
 रूक रहा हैैं तो बबूल के फूलों का रस कटे हुये स्थान पर लगा दें रक्तस्त्राव रूूूक जावेगा
 किन्तु इस विधि का उपयोग तभी करें जब आकस्मिक चिकित्सा का कोई साधन उपलब्ध नही हो ।

14.गर्भपात मेंं


यदि स्त्री को बार बार गर्भपात  की शिकायत हो तो बबूल के गौंद को घी में तलकर प्रतिदिन 5 ग्राम गोंद गर्भावस्थथा के प्रथम मास से तीन चार माह तक खिलायें गर्भपात की संभावना समाप्त हो जाती हैं ।


15.बालों को मज़बूत बनाता हैं


बालों यदि अकारण टूटकर गिरतें हो तो बबूल की फली को रात को पानी में भिगोकर छोड़ दें । सुबह इस पानी से बाल धों लें बाल मज़बूत और टीकाऊ बने रहेंगें ।

16.चोंट लगने पर

चोंट लगने पर बबूल के पत्तों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव बहुत तेजी से ठीक होता हैं ।

० टैकीकार्डिया

० काला धतूरा के फायदे और नुकसान

० फिटनेस के लियें सतरंगी खानपान

० फंगल इंफेक्शन

• द्राक्षारिष्ट में पाए जाने वाले तत्व

• गुडमार के औषधीय गुण और खेती की जानकारी



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Corona third wave : से बचने के सबसे बेस्ट तरीके

corona third wave की आहट सुनाई देने लगी हैं और इस corona third wave की चपेट में वो लोग अधिक हैं जिन्होंने corona vaccine की दोनों डोज लगवा ली हैं। दोस्तों एक बात समझना बहुत जरूरी हैं कि कोराना अब आपके बीच बहुत लम्बें समय तक रहने वाला हैं यह अब आप पर निर्भर करता हैं कि आप इस वायरस के प्रति अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं या फिर कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता के साथ कोरोना को आप पर हावी करवाना चाहते हैं। यदि कोरोनावायरस को खतरनाक वायरस से सामान्य फ्लू वायरस के रुप में बदलना हैं तो आपको प्राचीन आयुर्वेद जीवनशैली को हर हाल में अपनाना ही पड़ेगा। तो आईए जानतें हैं 8 बेस्ट तरीकों के बारें में 1.सुबह शाम दोड़ना शुरू करें कोरोनावायरस सबसे ज्यादा श्वसन तंत्र पर हमला करता हैं,कोरोना की दूसरी लहर में में अनेक लोग श्वसन तंत्र फैल हो जानें से मरें थे। ऐसा corona third wave  में न हो इसकी तैयारी हमें पहले से ही करना है।  मैंने अपने निजी अनुभव से देखा हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में खिलाड़ीयों को कोरोना के हल्के लक्षण ही प्रकट हुए थे और कोई भी खिलाड़ी गंभीर रूप से श्वसन तंत्र के संक्रमण से प्रभावित ...

Beauty tips: सर्दियों के लिए ये ब्यूटी टिप्स बहुत काम आएंगे

सर्दियाँ शुरू होतें ही बर्फीली हवाएं त्वचा को रूखा करना शुरू कर देती हैं यदि त्वचा का सही देखभाल इस दोरान नही की गई तो त्वचा को काफी नुकसान पंहुच सकता हैं और त्वता कठोर, फटी फटी सी ,काली झाइयुक्त हो जाती हैं जिसें बाद में सामान्य रूप में बदलना बहुत मुश्किल होता हैं । तो आईयें जानतें हैं 4 miracles ways to look Beautiful In Winter In Hindi ब्यूटी टिप्स सर्दियों में त्वचा की देखभाल कैंसे करें  सर्दियों में ब्यूटी टिप्स 1.सर्दियों में चेहरें की त्वचा की देखभाल कैंसें करें  सर्दियाँ शुरू होतें ही सबसे पहलें यदि कोई त्वचा फटती हैं तो वह हे चेहरे की त्वचा  बहुत नाजुक और संवेदनशील होती हैं । इसलिए इसकी देखभाल भी उसी अनुरूप करनी होती हैं ।  सर्दियाँ शुरू होतें ही चेहरें पर भाप लेना शुरू कर दें ऐसा पूरी सर्दी के दोरान तीन चार बार करें इससे चेहरें की त्वचा पर स्थित मृत कोशिकाएँ आसानी से निकल जाएंगी और स्वस्थ कोशिकाएँ भाप से मुलायम हो जाएगी फलस्वरूप सर्द हवाओं के कारण चेहरें की त्वचा रूखी नही रहेगी ।  सर्दियाँ शुरू होतें ही अच्छी कंपनी के माश्चुराजर साबुन या माश्चुराइ...

*पेट के रोग*

*पेट के रोग* *👉🏻(कब्ज) (वायुविकार, अजीर्ण) हमारे द्वारा भोजन ग्रहण करने के बाद उसका पाचन संस्थान द्वारा पाचन होता है। मुँह में ग्रास के चबाने के साथ ही पाचन क्रिया की शुरूआत हो जाती है। उसके बाद ग्रास नली द्वारा आमाशय में पहुँच कर भोजन के पचने की क्रिया आरंभ होती है। अगर इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुकावट होती है। तो फिर भोजन सही ढंग से नहीं पचता तथा अपच होती है और फिर कब्ज होती है। सही ढंग से मल का न निकलता ‘कब्ज़' कहलाता है यह रोग अधिक तनाव के कारण भी होता है। देर रात तक जागने, भोजन कम करने या ज्यादा तला भुना या चिकना भोजन करने से या किसी बिमारी के कारण भी हो सकता है। शोक, दुख, चिन्ता के कारण भी कब्ज हो जाता है। इसमें पेट में गैस बनने लगती है। हवा पास नहीं होती, खट्टी डकारें आती हैं तथा जी मिचलाने लगता है। इसके घरेलु उपचार निम्न हैं।* 1. अदरक की चटनी नमक मिलाकर चाटने से गैस पास होने लगती है। अदरक के रस में नींबू और पुदीने का रस मिलाकर पीने से रोग में आराम मिलता है यदि अवश्यक लगें तो एक दो चम्मच शहद भी मिला सकते हैं।  2. सौंठ + कालीमिर्च + पीपल को बराबर मात्...