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हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट क्या हैं ,यह कोरोना वायरस के उपचार में किस तरह से प्रयोग की जा रही हैं। Hydroxychloroquine SULFATE in hindi

हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट क्या हैं Hydroxychloroquine SULFATE in hindi  


हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट  मलेरिया के उपचार या बचाव के लियें उपयोग की  जानें वाली आधुनिक दवाई हैं । हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन की खोज सन् 1940 के विश्व युद्ध के समय की गई थी । 



हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट मलेरिया के उपचार या बचाव के लियें उपयोग की  जानें वाली आधुनिक दवाई हैं । हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन की खोज सन् 1940 के विश्व युद्ध के समय की गई थी ।
हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन सल्फेट

जब वैज्ञानिको को यह मालूम पड़ा की मलेरिया के उपचार में प्रयोग की जा रही परंपरागत दवा chlroquine मलेरिया को रोकनें में असफल सिद्ध हो रही हैं तो उन्होनें मलेरिया रोधी एक नई दवा हाइड्राक्सीकलोरोक्विन सल्फेट को इसके विकल्प के रूप में खोजा था ।

Hydroxychlroquie SULFATE अमेरिका जैसें देशों में गठिया और ल्यूपस बीमारी के उपचार में भी प्रयोग की जाती हैं । यह दवा शरीर के सूजन के विरूद्ध भी उपयोग में लाई जा रही हैं ।

Hydroxychlroquine SULFATE मुहँ से ली जानें वाली दवाई हैं जो चिकित्सकीय निर्देंशों के अनुसार prescribed की जाती हैं ।

हाइड्राक्सीकलोरोक्विन के संबध में कई अपुष्ट अध्ययन यह भी हैं कि यह वायरस से लड़नें हेतू शरीर की प्रतिक्रिया की  अधिक क्रियाशीलता को घटाती हैं जिससे कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली  सही प्रतिक्रिया सही समय पर कर शरीर के वायरस को खत्म कर सकें ।



Hydroxychlroquine SULFATE के मानव शरीर में होनें वालें दुष्प्रभाव  


० आँखों से कम दिखाई देना या आँखों से काला पीला नीला दिखाई देना

० त्वचा पर फुंसिया होना

० त्वचा का रूखा होना

० त्वचा का ढ़ीला पड़ना

० छाती में जकडाहट महसूस होना

० छाती में दर्द होना

० खाँसी होना या गले में खराश

० पैशाब का रंग बदलना

० पैशाब कम बनना

० सांस लेनें में परेशानी

० उल्टी दस्त लगना

० रात को देखनें में समस्या पैदा होना

० सिरदर्द होना

० अत्यधिक कमजोरी महसूस होना

० चक्कर आना

० ठंड के साथ या बिना ठंड के बुखार आना

० आँखों की पलक पर सूजन या पलकों के झपकनें की दर में वृद्धि

० सुनने की क्षमता में कमी

० आँखे लाल होना

० मानसिक स्थिति में परिवर्तन

० मुहँ या होंठों पर छाले होना

० पेटदर्द

० पैरो के निचले हिस्से पर सूजन

० मुहँ सूखना

० बार बार प्यास लगना

० भूख नही लगना

० कानों में घंटी सुनाई देना


Hydroxychlrouine SULFATE आजकल कोविड़ - 19 के उपचार के लिये पूरे विश्व में चर्चा में हैं क्यों ?


अमेरिकी राष्ट्रपति डाँनाल्ड़ ट्रम्प ने भारत से hydroxychlroquine माँगी हैं । इसके संबंध में यह दावा किया जा रहा हैं कि यह दवा एक अन्य दवा Azithromycine के साथ मिलकर covid - 19 के खिलाफ प्रभावी साबित होती हैं ।

 वास्तव में यह दावा कि hydroxychlroquine और Azithromycine covid - 19 के खिलाफ उपचार में प्रयोग की जा सकती हैं । चीनी अध्ययन का नतीजा हैं । जिसमें बताया गया कि इन दोनों दवाईयों का combination वायरस के प्रभाव को कम करता हैं । लेकिन यह बात वैज्ञानिक कसौटी पर पूर्णत: साबित नही की जा सकी हैं । क्योंकि अमेरिका में ऐसी खबर पढ़नें के बात कई लोग अपनें मन से इस combination का प्रयोग कर गंभीर रूप से बीमार हो गये और  अस्पताल पहुँच चुकें हैं ।

Hydroxychlrquine के संबध में एक अन्य प्रयोगशाला परीक्षण सिद्धांत यह कहता हैं कि यह दवाई alkline प्रकृति की हैं जबकि कोविड़ - 19 वायरस acidic प्रकृति का हैं ।

कोरोना वायरस एक गुच्छें के रूप में होता हैं, श्वसन संस्थान में प्रवेश करनें पर यह वायरस श्वसन संस्थान की कोशिकाओं में अपनी प्रतिकृति प्रवेश कराता हैं और इसके लियें acidic वातावरण की जरूरत होती हैं अब चूंकि hydroxychlrquune की प्रकृति alkline होती हैं अत : यह दवा श्वसन संस्थान में स्थित कोशिकाओं के ph को alkline कर देती हैं और वायरस वहाँ अपनी नई प्रतिलिपी नही बना पाता हैं । इस तरह कोरोना वायरस अपना प्रभाव नही दिखा पाता या मानव शरीर पर यह बहुत कम असर दिखा पाता हैं ।


एक अन्य प्रयोगशाला अध्ययन में जब मानव कोशिकाओं को वायरस से संक्रमित कर hydroxychlroquine से इन कोशिकाओं को धोया गया तो सार्स वायरस,इन्फ्लुएँजा ,सार्स कोविड़ -2 जैसे वायरस समाप्त हो गयें ।


इस परीक्षण के सन्दर्भ में डाँ.ओट्टों यंग जो कि डेविड़ गाफमेन इंस्टीट्यूट में माइक्रोबयलाजी और इम्यूनालाजी विभाग में कार्यरत हैं का मानना हैं कि "जरूरी नही जो लेब में घटित हो वही परिणाम वास्तविक बीमार मानव पर घटित हो " इसमें कुछ बदलाव भी हो सकता हैं ।


इन सब के अलावा एक बात यह भी हैं कि क्या hydroxychlroquine और Azithromycine का combination ऐसे कोविड़ वायरस से संक्रमित व्यक्ति को दिया जा सकता हैं जो पहले से ही उच्च रक्तचाप ,मधुमेह ,और ह्रदय रोग जैसी गंभीर बीमारी से संक्रमित हो। क्योंकि कई बार इन दवाईयों के combination का परिणाम आशानुरूप नही आये हैं ।


अभी हाल ही में ICMR यानि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन को कोरोना उपचार के प्रोटोकॉल से हटा दिया हैं।

ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि अब तक किए गए सारे अध्ययन निष्कर्षों में हाइड्राक्सीक्लोरोक्विन के कोरोनावायरस समाप्त करने वाले परिणाम प्राप्त नहीं हुए हैं।

जो भी हो आपदा चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न रही हो मानव इतिहास यही हैं कि मानव ने आपदाओं की प्रभावी रोकथाम की थी ,कर रहा हैं और करता रहेगा ।


कोराना वायरस की प्रभावी रोकथाम भी मानव बहुत जल्द करेगा इसी आशा के साथ ।







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