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प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना क्या है

 प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना क्या है ?


प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना केन्द्रीय बजट 2021 में घोषित एक देशव्यापी स्वास्थ्य योजना हैं । जिसमें  अचानक पैदा होनें वाली वैश्विक महामारियों के उचित समय पर नियंत्रण करनें हेतू उपाय किये गये हैं ।


पीएम आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के लिए केन्द्रीय बजट 2021 में 64,180 करोड़ रूपये आवंटित किये गये हैं । जो अगले 6 सालों में 10 हजार करोड़ प्रतिवर्ष के मान से खर्च कियें जायेंगे ।

प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना केन्द्रीय बजट 2021 में घोषित एक देशव्यापी स्वास्थ्य योजना हैं । जिसमें  अचानक पैदा होनें वाली वैश्विक महामारियों के उचित समय पर नियंत्रण करनें हेतू उपाय किये गये हैं ।




प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के उद्देश्य Aim of pm aatmnirbhar svasth bharat yojna



• इस योजना में पैदा होनें वाली बीमारीयों की निगरानी के लिए देश के सभी जिलों में Public health lab की स्थापना होगी और इन सभी को एकीकृत स्वास्थ सूचना प्रणाली से जोड़ा जायेगा ताकि बीमारी का रियल टाइम मानिटरिंग संभव हो सके ।



• गाँव से लेकर शहरों तक की स्वास्थ्य देखभाल करनें वाली संस्थाओ जैसें प्राथमिक, सामुदायिक ,जिला स्तरीय और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के माध्यम से विकास किया जायेगा।



• इस योजना के माध्यम से देशभर में 15 आपातकालीन आपरेशन केन्द्रों [ Emergency operation Center] और 2 चलित अस्पतालों [Mobile Hospital] की स्थापना की जाएगी ।



• देश से बाहर से आनें वाली बीमारीयों पर नजर रखनें के लिए इस योजना में 32 एयरपोर्ट ,11 समुद्री बंदरगाह और सात सडकों की सीमाओं पर स्थित स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध करानें वाली संस्थाओ को उन्नत करनें के साथ 17 नई स्वास्थ्य देखभाल करनें वाली संस्थाओ को खोला जायेगा ।


• National Center for disease control की पाँच क्षेत्रीय ईकाईयाँ देश के विभिन्न भागों में खोली जायेगी और इसके 20 सर्विलांस सेंटर देश के महानगरों में खोले जांएगे ।


• National institute of virology पुणे की तरह के चार अन्य National institute of virology देश के अलग अलग भागों में प्रधानमत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के माध्यम से स्थापित किये जांएगें ।



• देश में 9 नए लेबोरेटरी स्थापित होंगे जो कि BSL- 3 मानक के होंगे ।


• विश्व स्वास्थ्य संगठन [W.H.O.] के दक्षिण एशिया क्षेत्र की जरूरतों की पूर्ति हेतू एक विश्वस्तरीय "National institute of One health"की स्थापना की जायेगी ।


• देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 17,788 और शहरी भागों में 11,024 नये हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर Health And wellness centers खोले जाँएगें ।


• देश के 602 जिलों और 12 केन्द्र स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित किये जांएगें ।


• देश के 11 राज्यों के सभी जिलों में Integrated public health laboratory और 3382 ब्लाक स्तरीय पब्लिक हेल्थ यूनिट स्थापित की जाएगी ।


भारत में स्वास्थ सुविधा 


भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की बहुत अधिक आवश्यकता हैं क्योंकि हम आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के मामलें में दुनिया के 180 देशों में 145 वें स्थान पर हैं । भारत जैसें तेजी से विकसित होतें राष्ट्र के लिए यह स्थिति बहुत अच्छी नही हैं । 


भारत में स्वास्थ प्राथमिकता में शामिल हो इसके लिए हमें स्वास्थ सेवाओं में खर्च को जीडीपी के 10 प्रतिशत तक बढाना पढेगा जो कि अभी मात्र 2.5 प्रतिशत के आसपास हैं । दुनिया के विकसित देश जैसें अमेरिका,फ्रांस,, जर्मनी,रूस की बात करें तो अमेरिका में जीडीपी का कुल 17 प्रतिशत, फ्रांस में 11.2 प्रतिशत,जर्मनी में 11 प्रतिशत,रूस में 7.1 प्रतिशत खर्च किया जाता हैं ।


भारत स्वास्थ पर खर्च करनें के मामले में अपने पडोसी राष्ट्रों नेपाल,चीन और अफगानिस्तान से भी पिछे हैं । अफगानिस्तान अपनी जीडीपी का 8.2 प्रतिशत,चीन 5 प्रतिशत और नेपाल 5.8 प्रतिशत खर्च करता हैं ।


अभी हाल ही में ब्राजील ने कोरोनावायरस वैक्सीन के लिए हनुमान जी के संजीवनी बूटी लानें वाले चित्र के माध्यम से जो धन्यवाद दिया हैं वह भी स्वास्थ्य क्षेत्र में जीडीपी का 8.3 प्रतिशत खर्च कर में भारत से बहुत आगें है ।


देश में डाँक्टरों और नर्सों की कमी और उनको रोजगार  भी बहुत बडी चुनौती हैं सरकारी आंकडों के अनुसार देश में 14 लाख डाँक्टर और 20 लाख नर्सों की कमी हैं । 


W.H.O. के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक डाँक्टर होना चाहिए जबकि वर्तमान में 10198 लोगों पर एक चिकित्सक उपलब्ध हैं ।


दूसरी और देश में तकरीबन आठ लाख आयुष चिकित्सक रजिस्टर्ड हैं किंतु इनमें से अधिकांश बेरोजगार हैं यदि इन चिकित्सको को प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों में तैनात कर दिया जाए तो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता हैं । 


भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र मानव संसाधनों की अनेक विषमताओं से भी जूझ रहा हैं उदाहरण के लिए देश के अनेक भागों में नर्स और फार्मासिस्ट प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों  का वर्षों से सफल संचालन कर रहें हैं किंतु इनका क्षमता उन्नयन कर चिकित्सक बनानें जैसे कोई प्रावधान  स्वास्थ विभागों के पास नहीं हैं । इसके अभाव में इन्हें भी पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पातें फलस्वरूप ये लोग इन्ही पदों से सेवानिवृत्त हो जातें हैं ।



कोरोना जैसी महामारी ने यह संकेत दे दिया है कि हमें बीमारीयों की रोकथाम के लिए विश्व स्तरीय अस्पतालों के साथ मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि का भी काम भी करना है और यह आयुष चिकित्सा पद्धतियों जैसे योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी के बिना संभव नहीं हैं । 


यदि भारत  स्वास्थ क्षेत्र में विकसित होना चाहता हैं तो उसे  विकसित देशों का पिछलग्गू बनने की बजाय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुष [आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी,योग,नैचुरोपैथी, सेवा रिग्पा] में शोध के लिए ओर अधिक प्रयास करना होगा और इसके लिए देश के अलग अलग भागों में स्थित आयुष संस्थानों का सुदृढ़ीकरण करना होगा । क्योंकि आयुष चिकित्सा पद्धति वह  आरोग्य प्रदान कर सकती हैं जिसमें बीमारी होने का इलाज नहीं बल्कि बीमारी हो ही नहीं इस बात का सिद्धांत हैं ।


केन्द्रीय बजट 2021 में 2,23,846 करोड़ रूपये की धनराशि स्वास्थ्य सेंवाओं के लिए रखी गई हैं जो कि पूर्व के वर्षों में 94,452 करोड़ रूपये थी ,इस प्रकार देखा जाए तो यह राशि पूर्व में आँवटित राशि के मुकाबले 137 गुना अधिक हैं । इतनी अधिक बढोतरी कभी नहीं हुई थी,इससे यही अर्थ निकाला जा सकता हैं कि सरकार कोरोनावायरस के बाद ही सही ,पर स्वास्थ्य तंत्र के मजबूतीकरण के लिए गंभीर हुई हैं ।

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