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संदेश

गर्भ संस्कार ,pregnancy Care

आयुर्वैद चिकित्सा पद्धति यदि आज तक अपना अस्तित्व बनायें हुयें तो इसका सम्पूर्ण स्रेय आयुर्वैद के उन  महान आचार्यों  को जाता हैं, जिन्होनें बीमारीं को मात्र बीमारीं के रूप में न देखकर इसके सामाजिक, आर्थिक,मनोंवेञानिक,पर्यावरणीय कारको तक की चर्चा अपनें ग्रन्थों में की.एेसा ही एक महत्वपूर्ण मसला बच्चों की परवरिश को लेकर हैं. गर्भ संस्कार भी आयुर्वैद की इसी महान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता हैं जिसकी चर्चा आधुनिकतम विञान भी करता हैं कि बच्चों की परवरिश बच्चें के दुनिया में आनें की बाद की प्रक्रिया नहीं है,बल्कि यह तो बच्चें के गर्भ में आनें के बाद ही शुरू हो जाती हैं. महाभारत में अभिमन्यु ने चक्रव्यू भेदनें का राज़ अपनी माँ के गर्भ में ही जान लिया था.आज के लोग पूछतें हैं,क्या यह संभव था ? और आज क्या यह संभव हैं ?इस सवाल का जवाब यही हैं कि यदि आपनें प्राचीन भारतीय आयुर्वैद ग्रन्थों और अन्य परंपरागत शास्त्रों का अध्ययन किया होता तो इस सवाल को पूछनें की ज़रूरत ही नहीं पड़ती फिर भी बताना चाहूँगा कि गर्भ संस्कार वही विधि हैं जिसके माध्यम मनचाहे व्यक्तित्व को ढाला (program)  जा...

ALLERGIES TREATMENT

क्या हैं एलर्जी::- एलर्जी एक प्रकार की शारिरीक और मानसिक प्रतिक्रिया हैं,जो शरीर के सम्पर्क में आनें वालें पदार्थों के प्रति शरीर पैदा करता हैं. वास्तव में एलर्जी हमारें शरीर के बिगड़ी हुई रोग प्रतिरोधकता   ( immune system)  को रेखांकित करती हैं.जिसमें हमारा शरीर हानिकारक पदार्थों के साथ मित्र पदार्थों के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशीलता  प्रदर्शित करता हैं. कारण::- १.खाद्य पदार्थों के कारण. २.परफ्यूम,रंग,ड़ाई के इस्तेमाल से. ३.कीड़ों,मच्छर के काट़नें से. ४.पराग कणों,धुल,धुँए से. ५.आनुवांशिकता जन्य. ६.दवाईयों ,एन्टीबायोटिक के कारण. ७.मौसम में परिवर्तन की वज़ह से. लछण::- १.आँखों से पानी निकलना,खुजली, लाल होना,सुजन होना. २.त्वचा में चकते निकलना, खुजली. ३.नाक में खुजली, पानी निकलना, लगातार छींकें आना. ४.अस्थमा, फेफडों में खीँचाव,गलें में खरास. ५.पेटदर्द ,डायरिया,पेट़ फूलना. ६.कानों में दर्द खुजली, सुनाई कम देना. उपचार::- आयुर्वैद चिकित्सा  में हमारें बिगड़े हुए इम्यून सिस्टम को प्रभावी बनानें की अ...

URINARY TRACT INFECTION CAUSE SYMPTOM

परिचय::- सम्पूर्ण विश्व में मूत्र सम्बधी बीमारीयों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है,इन बीमारीयों में एक महत्वपूर्ण बीमारीं है मूत्र मार्ग का संक्रमण (urinary tract infection) .इस संक्रमण का प्रभाव पुरूषों की अपेक्षा  महिलाओं  में अधिक देखा गया हैं.यह जीवाणुजनित(Bacteria) से उत्पन्न होनें वाला रोग है जो ई.कोलाई(E.coli) नामक बैक्टरिया से फैलता है.यदि संक्रमण मूत्र मार्ग से होते हुये गुर्दे तक फैल जाता है,तो इसे पाइलोनेफ्राइटिस कहा जाता हैं.  कारण::- १.माहवारी के समय योनि की उचित देखभाल का अभाव २.असुरक्षित योन संसर्ग. ३.कैथैटर के कारण. ४.पथरी # kidney stone के कारण. ५.पानी कम पीनें के कारण. लक्षण::- १.मूत्र करते समय पस का आना. २.मूत्र करते समय खून का आना. ३.मूत्र के समय दर्द तथा जलन. ४.बुखार के साथ पीठ,पेडू व पेट के निचें तीव्र दर्द. ५.बार-बार मूत्र त्यागनें की इच्छा के साथ बूँद-बूँद मूत्र आना. ६.अजीब सी शारिरीक सुस्ती और चेहरा कांतिहीन होना. उपचार::- १.चन्द्रप्रभा वटी, त्रिभुवनकिर्ती रस , हल्दी को समान भाग में मिलाकर ...

paralysis treatment। लकवा उपचार

लकवा क्या हैं lakva kya hai ::- यदि मस्तिष्क की रक्तवाहिनीयों में रक्त का थक्का जम जाता है या मस्तिष्क की रक्तवाहिनीयाँ फट़ जाती हैं या मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह कम हो जाता हैं फलस्वरूप मस्तिष्क का नियत्रंण अंगों पर नहीं रहता और अंग काम करना बंद कर देतें हैं यही अवस्था लकवे के नाम से जानी जाती हैं. यदि मस्तिष्क का बाँया भाग प्रभावित होता है तो दाँया भाग और दाँया भाग प्रभावित होता हैं तो बाँया भाग लकवाग्रस्त हो जाता हैं. आयुर्वैदानुसार जब वायु कुपित होकर दाँए या बाँए भाग पर आघात कर शारिरीक इच्छाओं का नाश कर अनूभूति को समाप्त कर देती हैं यही अवस्था लकवा के नाम से जानी जाती हैं. लकवा कितने प्रकार का होता है  १.मोनोप्लेजिया या एकांगघात -- इसमें एक हाथ या एक पैर कड़क हो जाता हैं. २.ड़ायप्लेजिया --सम्पूर्ण शरीर में लकवाग्रस्त हो जाता हैं. ३.फेशियल पेरालिसीस या चेहरे का लकवा--इसमें चेहरा,नाक ,होंठ गाल पर नियत्रंण नहीं रहता हैं. ४.जीभ का लकवा ● पेट के छाले क्यों होते हैं यहाँ जाने लकवा होने के कारण::- १.उच्च रक्तचाप लगातार २०० से अधिक रहना. २.मस्तिष्क में ग...

HOW TO BOOST IMMUNITY POWER WITH AYURVEDA

इम्यूनिटी::- हमारें शरीर में रोगों से लड़नें की प्राक्रतिक प्रतिरोधकता विधमान रहती है,यदि शरीर बीमार पड़ता हैं,तो यह प्रतिरोधकता हमारें शरीर की बीमारीयों से लड़ने में मदद करती हैं.किंतु पिछलें दशकों में हमारी जीवनशैली ( lifestyle ) में आये बदलाव ने हमारी प्रतिरोधकता को बुरी तरह से प्रभावित किया हैं. इसे इस प्रकार समझा जा सकता हैं कि शरीर बाहरी बीमारीयों से लड़नें के बजाय अपनें खुद के शरीर से लड़नें लगा हैं, यही कारण हैं कि आज हर दस व्यक्तियों में से चार व्यक्ति ऑटो इम्यून ड़िसीज़ जैसे एलर्जी, Rumetoid arthritis , asthma बार बार बीमार होना   और अन्य इस तरह की बीमारीयों से जकड़ा हुआ हैं कि उसका डाँक्टर और केमिस्ट से मिलना रोज़ की बात हो गई हैं.किन्तु वास्तविकत में यदि हम आयुर्वैद और योग की सहायता से जीवन का प्रबंधन करें तो काफी खुशहाल और रोगमुक्त जीवन जी सकतें हैं.आईयें जानतें है,इम्यूनिटी बढ़ानें वाले उपाय योग::- १.सुबह उठते ही नित्यकर्मों से निवृत्त होकर योगिक क्रियाएँ  अवश्य करें योग क्रियाओं में सबसे महत्वपूर्ण आसन सूर्य नमस्कार है जो इम्यून सिस्टम को मज़बू...

CANCER AND AYURVEDA

कैंसर विश्व की सबसे प्रचलित और भयावह बीमारींयों में से एक हैं. आज यह बीमारीं महामारी के रूप में फैल रही है,अभी भी यह बीमारीं चिकित्सा शास्त्रीयों के लिये असाध्य बनीं हुई है.यदि आरम्भिक अवस्था में इसबीमारीं का पता लग जावें तब ही इसकी प्रभावीरोकथाम संभव है,अन्यथा यह बीमारीं मोत तक पीछा नहीं छोड़ती है.आज सौ से अधिक प्रकार का कैंसर चिकित्सा शास्त्रीयों ने खोज लिया है,कैंसर वास्तव में शरीर की कोशिकाओं का असामान्य रूप से बढ़ना हैं. कारण::- कैंसर के जितनें भी कारण है उनमें अधिकांशत: मानवजनित या जीवनशैली से  संबधित है जैसे १. तम्बाकू --यह विश्व में कैंसर का सर्वप्रमुख कारक है,लगभग ३५ % कैंसर तम्बाकू के प्रयोग से ही होते है. २.मोटापा, मोबाइल रेड़िएशन,खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त कृत्रिम रंग. ३.आनुवांशिक कारणों से, प्रदूृषण,शारीरिक अक्रियाशीलता. ४.सूर्य से निकलनें वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से. लक्षण ::- १.शरीर के किसी भी भाग में गांठ का होना जो लम्बें समय से ठीक नहीं हो रही हो. २.रक्त कैंसर की दशा में खून न बनना,चक्कर, उल्टी होना. ३.त्वचा कैंसर में त्वचा निकलना, फट़ना,...

MALARIA - लक्षण, कारण और उपचार

मलेरिया परिचय::- मलेरिया [MALARIA] दो इटालियन शब्द "माल" और "अरिया" से मिलकर बना हैं जिसका शाब्दिक अर्थ हैं "खराब वायु" 18 वीं शताब्दी में जब मलेरिया होने के वास्तविक कारणों का पता नहीं था तब लोगों का मत था कि मलेरिया होने का कारण दलदली भूमि के आसपास की हवा खराब होती हैं इस कारण मलेरिया होता हैं। मलेरिया के मच्छरों का सर्वाधिक प्रसार भूमध्यसागरीय क्षेत्रों की उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में होता हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो मलेरिया अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में मलेरिया के मामले अधिक पाए जाते हैं। मलेरिया विश्व की दस सबसे प्रचलित बीमारियों मे से एक है, जो प्रतिवर्ष विश्व के साठ करोड़ लोगों को अपनी चपेट में लेता है.यह रोग मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, मलेरिया[MALARIA] कैसे फैलता है  मलेरिया परजीवी के जीवन चक्र का कुछ भाग मनुष्य के रक्त में तथा शेष भाग मच्छर के शरीर में गुजरता है ।जब मादा एनाफिलीज मच्छर मलेरिया संक्रमित व्यक्ति का रक्त चूसती हैं, तो रक्त के साथ मलेरिया परजीवी भी उसके अमाशय में पंहुचा जातें हैं। 10 से 14 दिन ब...