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Rapo rate Reserve Rapo rate and cash reserve ratio

रेपो दर (Repo rate)  जिस दर पर रिज़र्व बैंक अन्य  बैंकों को नकदी उपलब्ध करवाता हैं,उस दर को रेपो दर कहा जाता हैं. यदि बाज़ार में नकदी की कमी हो जाती हैं तो बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से उधार लेकर उस पर रिज़र्व बैंक को ब्याज अदा करतें हैं.इस ब्याज की दर की घोषणा रिज़र्व बैंक समय समय पर अपनी मोद्रिक नितियों के माध्यम से करता हैं. रेपो दर के अधिक होनें या कम होनें का सीधा सम्बंध बैंक के ग्राहकों द्धारा लिये गये लोन से हैं.यदि रेपो दर अधिक होगी तो बैंक भी ग्राहकों से अधिक ब्याज वसूलेंगें.तथा ब्याज दर बढ़ी हुई रहेगी. नक्सलवाद और आतंकवाद रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo rate)  जिस दर पर रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों से उधार लेता हैं.उस दर को रिवर्स रेपोदर कहतें हैं.यह रेपो दर का विपरित हैं.  रिज़र्व बैंक को जब यह समाधान हो जाता हैं कि बाज़ार में नकदी का प्रवाह अधिक हो गया हैं,और इससे मुद्रास्फीति होनें की संभावना हैं,तो वह बाज़ार से नकदी उठाने की कार्यवाही करनें लगता हैं. जिससे मँहगाई नियत्रिंत होती हैं. नकद आरक्षी अनुपात (cash reserve ratio) प्रत्य...

Chandrasekhar Aajad चन्द्रशेखर आजाद

चन्द्रशेखर आजाद ///जीवन परिचय/// ::: 1.पूरा नाम -- पंडित चन्द्रशेखर तिवारी 2.दूसरा नाम -- आजाद 3.जन्म       -- 23 जुलाई 1906 4.जन्म स्थान -- भाबरा [मध्यप्रदेश] 5.मृत्यु          -- 27 फरवरी 1931 ,अल्फ्रेड़ पार्क                           इलाहबाद  चन्द्रशेखर आजाद के पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी था.वे उत्तरप्रदेश के उन्नाव जिले के बदर गाँव के रहने वाले थे.अपने गाँव मे भीषण अकाल पड़ने के कारण वे अपने रिश्तेदार के यहाँ भाबरा आ गये और यही बस गये.आरम्भिक शिक्षा के पश्चात वे बनारस चले गये जहाँ संस्कृत विधापीठ मे भर्ती होकर संस्कृत का अध्ययन करने लग गये. आजाद बचपन से ही निर्भीक प्रवृत्ति के थे.एक बार दीपावली के समय उनका साथी रंग - बिरंगी माचिस की तीलीयाँ जलाने मे काफी डर रहा था. आजाद ने यह देखा तो उससे माचिस लेकर कहा कि तुम कितने डरपोक हो और आजाद ने माचिस से सभी तिलियाँ निकालकर उन्हें माचिस पर रगड़ दिया चूंकि तिलीयाँ आडी तिरछी रखी हुई थी और कुछ तिलीयों ...

Til Tail ke fayde [तिल तेल के फायदे]

# तिल के तेल के फायदे   तिल का तेल यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है. और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे. तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को...

GAJAR GHAS गाजर घास का उन्मूलन कैसे करें

 गाजरघास गाजर घास का वानस्पतिक नाम gajar ghas ka vansptik nam पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस [ parthenium hysterophorus ] हैं.यह एस्टेरेसी कुल का सदस्य हैं. इसके फूल सफेद रंग के होनें से इसे चटक चांदनी भी कहा जाता हैं.यह मूल रूप से अमेरिका और वेस्टइंडीज का पौधा हैं,जो पूरे विश्व में आयातित पदार्थों के माध्यम से विश्व में फैल गया. भारत में यह पौधा लगभग 35 लाख हेक्टेयर में अनचाहे रूप से उगा हुआ हैं । मनुष्यों पर गाजर घास के हानिकारक प्रभाव  गाजर घास के बहुत ही हानिकारक प्रभाव मानव स्वास्थ पर देखे गये हैं.इसमें घातक एलिलो रसायन जैसें एम्ब्रोसीन ,पार्थेनिन , कोरोनोपीलिन,फेरुलिक अम्ल,वेनिलीक अम्ल, कैफीन अम्ल ,पेरा - हाइड्राँक्सी बेन्जोइक अम्ल, तथा पेरा - काउमेरिक अम्ल पाये जातें हैं.ये घातक रसायन इसके सम्पर्क में आनें व्यक्ति वालें व्यक्तियों की त्वचा में खुजली ,एलर्जी , एक्जिमा जैसे घातक रोग पैदा करते हैं. इसमें पाया जानें वाला पार्थेनिन मनुष्य की तंत्रिका     तंत्र को को प्रभावित कर डिमेंशिया,डिप्रेशन,अवसाद,सिरदर्द ,माइग्रेन जैसे रोग पैदा करता हैं. गाजर घ...

चने की खेती और उपयोग [CHANE KI KHETI AUR UPYOG]

भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र  हैं,जहाँ लगभग 72% ग्रामीण आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती किसानी से जुड़ी हुई हैं.किन्तु आज देश का 80 फीसदी किसान कोई अन्य रोजगार मिलनें पर कृषि कार्य छोड़नें को राजी बैठा हैं,एक ज़मानें में खेती के बारें में कई किवंदंतिया प्रचलित थी जैसें    चने की फसल उत्तम खेती ,मध्यम व्यापार और निकृष्ट चाकरी किन्तु आज खेती को सबसे निकृष्ट माना जाता हैं.क्योंकि खेती आज जीवन निर्वाह जीतना भी पैसा परिवार को नही दे पाती उल्टा खेती करने वाला किसान खेती करतें - करतें इतना कर्जदार हो जाता हैं,कि अंत में सिर्फ आत्महत्या ही उसके अधिकार में रह जाती हैं,किसानों की आत्महत्या में बड़ा योगदान घट़िया बीजों का भी रहता हैं,यदि किसान थोड़ी सावधानी रखकर उचित समय पर उचित बीज और परिस्थितियों के अनुसार खेती करें तो निश्चित रूप से मुनाफा कमा सकता हैं,इन्ही परिस्थितियों के अनुसार आज हम चने की खेती और उसके बीजों के विषय में किसानों को जागरूक करना चाहतें हैं. जल प्रबंधन के बारें में विस्तारपूर्वक जानियें #.चने का परिचय ::: चना रबी की फसल हैं,जो अक्टूबर- नव...

SINGHADE [WATER CHESTNUT] KE FAYDE

SINGHADE [WATER CHESTNUT] KE FAYDE परिचय :::  Singhade  सिंघाडा जलाशयों में पैदा होनें वाला एक अत्यन्त पोष्टिक,शाकाहारी फल हैं,इसकी बाहरी त्वचा कठोर होती हैं,जबकि अन्दर का फल मुलायम,स्वादिष्ट,और सफेद रंग का होता हैं.भारतीयों समाज में सिंघाड़ा अनुपम स्थान रखता हैं, क्योंकि इसके बने आटे की रसोई उपवास जैसे पवित्र तप में उपयोग लाई जाती हैं. सिंघाड़े की प्रकृति ::: सिंघाड़ा शीत प्रकृति का फल हैं. सिंघाड़े में पाये जानें वालें पोषक तत्व :::   पानी                    प्रोटीन.                 फायबर 70 Gm.                 4.7 gm.              0.6mg   वसा                   शुगर.               खनिज तत्व 0.3 gm.             23.3 gm.           ...

गहरी नींद लाने के तरीके

गहरी नींद लाने के तरीके आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी नींद भी एक सपना बन गई हैं.वे लोग वास्तव में ख़ुशनसीब होतें हैं,जिनकी रात को नींद लगनें के बाद सीधी सुबह ही होती हैं. नींद हमारें स्वास्थ के लियें उतनी आवश्यक हैं, जितनी की आँक्सीजन बगैर सोये हम ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रख सकते ,यदि हम 24 घंटे नहीं सो पायेगें तो उसका नकारात्मक प्रभाव हमारें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ पर पड़ेगा. आयुर्वेदाचार्यों ने निद्रा का वर्गीकरण कई प्रकार से किया हैं, आचार्य सुश्रुत के अनुसार जब ह्रदय तम से आवृत होता हैं,तो नींद आती हैं,और जब तम अल्प होकर सत्व प्रबल होता हैं,तो नींद खुल जाती हैं. आधुनिक शोधार्थी और scientist नींद पर लगातार शोध कर रहे हैं,परन्तु उनका शोध आज तक नींद आनें को लेकर तर्कपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत नहीं कर सका हैं. उम्र के हिसाब से  कितनी नींद आनी चाहिए इसकी व्याख्या मनोचिकित्सकों द्धारा की गई हैं,जैसें • 2 वर्ष की आयु तक 16 घंटे की नींद आवश्यक हैं. • 3 से 12 वर्ष   की आयु तक 10 घंटे नींद आवश्यक है। • 13 से 18 वर्ष की उम्र तक 10 घंटे नींद ...