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कोरोना वायरस से बचाव के भारत सरकार द्धारा जारी दिशा निर्देश

 कोरोना वायरस *कोरोना वायरस NOVEL CORONA VIRUS ( n- CON) लक्षण   • सर्दी खाँसी • गले में खराश  • फेफड़ों में संक्रमण • साँस लेनें में तकलीफ • बुखार  • निमोनिया *उपचार - भारत बायोटेक की कोवेक्सिन मानवीय परीक्षण की प्रक्रिया में है।* *संक्रमण की पुष्टि होनें पर घबराये नही यह रोग असल मे चमगादड़ और सांप में होता है, लेकिन चीन में चमगादड़ के सूप पीने की वजह से यह मनुष्यों में फैला है ! छींकने और सम्पर्क में आने से फैल रहा है यह खतरनाक वायरस !  coronavirus बचाव ● यात्रा करते वक़्त मास्क ज़रूर पहने ! ● किसी भी जुकाम या सर्दी से पीड़ित व्यक्ति का तुरंत इलाज कराए। ● सांप ,समुद्री उत्पाद कच्चा माँस  और पक्षियों का सेवन बिल्कुल भी न करे । ● किसी व्यक्ति से हाथ मिलाने के बाद हाथ साबुन से धोये बिना धोए अपने आंख ,नाक को ना छुये। • छींकते और खाँसते समय रूमाल नाक और मुँह पर अवश्य रखें । • भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर जानें से बचें यदि जाना आवश्यक हो तो समुचित चिकित्सकीय सलाह के बाद ही जायें। • गर्म पेय पदा...

शास्त्रों में लिखे तेल के फायदे जानकर हेरान हो जायेंगें Tel ke fayde jankar heran ho jayenge

तेल के फायदे प्राचीन चिकित्सा पद्धति में तेल के माध्यम से व्यक्ति को निरोग रखा जाता था । ऐसे ही कुछ महत्वपूर्ण तेलों का वर्णन चरक संहिता में किया गया हैं आईये जानतें हैं इन तेलों के फायदे के बारें में , तेल के फायदे जानकर आप भी आश्चर्यचकित रह जायेंगे । तिल के तेल के फायदे ::: कषायानुरसंस्वादुसूक्ष्ममुष्णंव्यवायिच।   पित्तलंबद्धविण्मूत्रंन चश्लेष्माभिवर्द्धनम् ।।वातन्घेषूत्तमंबल्यंत्वच्यंमेधाग्निवर्धनम् तैलसं। तैलंसंयोगसंस्कारात्सर्वरोगापहंमतम्।। अर्थात  तिल का तेल स्वाद में कषाय ,स्वादिष्ट और हल्का होता हैं । तिल के तेल के अणु बहुत सूक्ष्म होतें हैं जिससे यह शरीर के जिस अंग पर लगता हैं उस अँग के अंदर तक पहुँचकर फायदा पहुँचाता हैं ।  तिल के तेल के फायदे तिल का तेल गर्म प्रकृति का होता हैं इसके सेवन से पित्तवर्धन होता हैं । और भूख खुलकर लगती हैं । तिल का तेल मल और मूत्र को रोकता हैं अर्थात  इसके सेवन से मूत्राशय और मल संस्थान मज़बूत बनते हैं ।  कफ प्रकृति के लोग तिल का तेल सेवन करते हैं तो उन्हें सर्दी खाँसी आदि की समस्या नही होगी...

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण और पलाश वृक्ष की प्रकृति

पलाश वृक्ष के औषधीय गुण   पलाश वृक्ष के औषधीय गुण पलाश या ढ़ाक सम्पूर्ण भारत में पाया जानें वाला वृक्ष हैं । आयुर्वेद चिकित्सा में इस वृक्ष को दिव्य औषधी की तरह प्रयुक्त किया जाता हैं । पलाश के वृक्ष 15 से 20 फीट तक लम्बें होतें हैं । पलाश वृक्ष के पत्तें एक साथ तीन के गुच्छे में होतें हैं । पलाश पर केशरिया रंग के तोतें की चोंच समान फूल खिलते हैं और लम्बी - लम्बी फलियों में इसके बीज रहतें हैं । पलाश वृक्ष की छाल मोटी और खुरदरी होती हैं । जिस पर गोंद निकलता हैं । आयुर्वेद चिकित्सा में पलाश के फल,फूल,पत्तें जड़ और गोंद समेत सम्पूर्ण वृक्ष का उपयोग किया जाता हैं ।  पलाश वृक्ष के विभिन्न भाषाओं में नाम  पलाश का संस्कृत नाम ::: पलाश, किशुक ,रक्तपुष्प और कमलासन  हिन्दी नाम ::: ढ़ाक , टेसू ,केसू ,खाकरा ,पलाश पलाश का लेटिन नाम ::: Butea frondosa ,Butea monosperma आयुर्वेद मतानुसार पलाश की प्रकृति ::: आयुर्वेद मतानुसार पलाश अग्निदीपक ,स्निग्ध, गर्म और कसेला होता हैं । पलाश वृक्ष के औषधीय गुण ::: आँत...

पारस पीपल के औषधीय गुण

पारस पीपल के औषधीय गुण Paras pipal KE ausdhiy gun ::: पारस पीपल के औषधीय गुण पारस पीपल का  वर्णन ::: पारस पीपल पीपल वृक्ष के समान होता हैं । इसके पत्तें पीपल के पत्तों के समान ही होतें हैं ।पारस पीपल के फूल paras pipal KE phul  भिंड़ी के फूलों के समान घंटाकार और पीलें रंग के होतें हैं । सूखने पर यह फूल गुलाबी रंग के हो जातें हैं इन फूलों में पीला रंग का चिकना द्रव भरा रहता हैं ।  पारस पीपल के  फल paras pipal ke fal खट्टें मिठे और जड़ कसैली होती हैं । पारस पीपल का संस्कृत नाम  पारस पीपल को संस्कृत  में गर्दभांड़, कमंडुलु ,कंदराल ,फलीश ,कपितन और पारिश कहतें हैं।  पारस पीपल का हिन्दी नाम  पारस पीपल को हिन्दी में पारस पीपल ,गजदंड़ ,भेंड़ी और फारस झाड़ के नाम से जाना जाता हैं । पारस पीपल का अंग्रेजी नाम Paras pipal ka angreji Nam ::: पारस पीपल का अंग्रेजी नाम paras pipal ka angreji nam "Portia tree "हैं । पारस पीपल का लेटिन नाम Paras pipal ka letin Nam ::: पारस पीपल का लेटिन paras pipal ka letin nam न...

हरसिंगार किन रोगों में फायदेमंद हैं

हरसिंगार या पारिजात के फायदे   हरसिंगार हरसिंगार का संस्कृत नाम क्या हैं ? हरसिंगार को संस्कृत में पारिजात ,प्रजापत ,हारश्रृंगार ,नल कुंकुम और रागपुष्पी नामों से जाना जाता हैं । हरसिंगार का देशी नाम क्या हैं ? हरसिंगार को देशी भाषा में सियारी,बिनारी, सिंगार और पारिजात के नाम से जाना जाता हैं । हरसिंगार का लेटिन नाम क्या हैं ? हरसिंगार का लेटिन नाम निकटेथिस आरबेस्ट्रिटस   Nyctanthes arbortristis हैं। हरसिंगार को इंग्लिश में क्या कहतें हैं ? हरसिंगार को इंग्लिश में coral jasmine कहतें हैं।     हरसिंगार का परिचय ::: हरसिंगार के वृक्ष की लम्बाई 5 से लेकर 12 फीट तक होती हैं । इसमें सफेद रंग के फूल आतें हैं जिनकी खुशबू  बहुत आनंदमय होती हैं । हरसिंगार के फूलों की डंडिया केसरिया रंग की होती हैं।  हरसिंगार के औषधीय उपयोग ::: वातव्याधि में हरसिंगार के फायदे ::: गठिया, जोड़ों के दर्द जैसी वातव्याधि  वाली बीमीरियों में हरसिंगार के पत्तों और ताजें फूलों का क्वाथ  बनाकर पिलानें से ...

गिलोय के फायदे । GILOY KE FAYDE

  गिलोय के फायदे GILOY KE FAYDE गिलोय का संस्कृत नाम क्या हैं ? गिलोय का संस्कृत नाम गुडुची,अमृतवल्ली ,सोमवल्ली, और अमृता हैं । गिलोय का हिन्दी नाम क्या हैं ? गिलोय GILOY का हिन्दी नाम 'गिलोय,अमृता, संशमनी और गुडुची हैं । गिलोय गिलोय का लेटिन नाम क्या हैं ? गिलोय का लेटिन नाम Tinospra cordipoolia (टिनोस्पोरा  कोर्ड़िफोलिया ) गिलोय की पहचान कैसें करें ? गिलोय सम्पूर्ण भारत वर्ष में पाई जानें वाली आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध औषधी हैं । Ayurveda ki suprasiddh oshdhi hai यह बेल रूप में पाई जाती हैं, और दूसरें वृक्षों के सहारे चढ़कर पोषण प्राप्त करती हैं । गिलोय के पत्तें दिल के (Heart shape) आकार के होतें हैं।  गिलोय का तना अंगूठे जीतना मोटा और प्रारंभिक   अवस्था में हरा जबकि सूखनें पर धूसर हो जाता हैं । गिलोय के फूल छोटे आकार के और हल्का पीलापन लियें गुच्छों में लगतें हैं । गिलोय के फल पकनें पर लाल रंग के होतें हैं यह भी गुच्छों में पाये जातें हैं । गिलोय में पाए जाने वाले पौषक तत्व 1.लोह तत्व : 5.87 मिलीग्राम 2.प्रोटीन : 2....

एंकेलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस Ankylosing Spondylitis

*एंकेलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस*, जिसे कभी-कभी "स्पॉन्डिलोअर्थराइटिस" कहा जाता है, गठिया का एक रूप है जो आम तौर पर रीढ़ की हड्डी में होता है, हालांकि यह अन्य जोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है। वास्तव में, "स्पॉन्डिलाइटिस" शब्द संबंधित बीमारियों के समूह से जुड़ा हुआ है जिनकी प्रगति और लक्षण तो समान हैं, लेकिन ये बीमारियां शरीर के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करती हैं। यह कशेरुक (वर्टिब्रे: कई कशेरुक मिल कर रीढ़ की हड्डी बनाती हैं) की गंभीर सूजन का कारण बनती है जो अंततः गंभीर पीड़ा और अक्षमता का कारण बनती है। कई गंभीर मामलों में, सूजन के कारण रीढ़ की हड्डी पर एक नई हड्डी बन सकती है (बोन स्पर)। इससे शारीरिक विकृति भी हो सकती है। इसमें, पीठ में कशेरुक एक साथ फ्यूज हो जाते हैं जिससे कूबड़ होता है और लचीलेपन में कमी आती है। कुछ मामलों में, इससे पसलियां भी प्रभावित होती हैं जिससे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। स्पॉन्डिलाइटिस महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है। 🔹 *Ankylosing Spondylitis के लक्षण ▪सुबह उठते ही कमर में अकड़न खराब मुद्रा होना। ▪भूख में...